लखनऊ। केजीएमयू इलाज के साथ ही अब चिकित्सा संबंधी उपकरण भी विकसित करेगा। संस्थान में इंक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की गई है। यह इंक्यूबेशन सेंटर कंपनी के रूप में पंजीकृत कराया जाएगा। इससे यहां विकसित उपकरण बाजार में आ सकेंगे। केजीएमयू की कार्य परिषद ने इस पर मुहर लगा दी है।
केजीएमयू में किसी भी दूसरे चिकित्सा संस्थान के मुकाबले मरीजों की संख्या ज्यादा रहती है। इनकी समस्याओं को देखते हुए चिकित्सीय उपकरण विकसित करने की संभावना ज्यादा रहती है।
इन पांच क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
- चिकित्सा उपकरण और निदानः पोर्टेबल और किफायती जांच के लिए उपकरणों का विकास और चिकित्सा उपकरणों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण।
- डिजिटल स्वास्थ्य और टेलीमेडिसिन: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के लिए टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म का निर्माण और दूरस्थ रोगी निगरानी के लिए डिजिटल समाधान।
- जैव प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स: दवा वितरण प्रणालियों में नवाचार, जीनोमिक्स और व्यक्तिगत चिकित्सा में अनुसंधान।
- स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विज्ञान: कृत्रिम बुद्धिमत्ता संचालित स्वास्थ्य सेवा विश्लेषण और रोग की भविष्यवाणी और निदान के लिए मशीन लर्निंग अनुप्रयोग।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली नवाचार: स्वास्थ्य सेवा पहुंच और सामर्थ्य में सुधार के लिए समाधान।