लखनऊ। केजीएमयू यूरोलॉजी विभाग में करोड़ों रुपये के दवा घोटाले की जांच में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। बीते दिनों एक बर्खास्त कर्मचारी की अलमारी से करीब दो लाख रुपये की दवाएं मिली थीं। सोमवार को बर्खास्त किए गए अन्य कर्मचारियों की तीन और अलमारियों का ताला कमेटी की मौजूदगी में खोला गया। इनसे करीब तीन लाख रुपये की दवाएं बरामद हुई हैं। जांच समिति इन दवाओं को का मिलान स्टॉक और खरीद रिकॉर्ड से कर रही है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि बरामद दवाएं आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री राहत कोष, प्रधानमंत्री राहत कोष और अन्य सरकारी योजनाओं के बजट से खरीदी गई थीं। इन दवाओं का मरीजों तक पहुंचने के बजाय कर्मचारियों की अलमारियों में मिलना गंभीर अनियमितता माना जा रहा है। जांच कमेटी यह पता लगा रही है कि दवाएं किस परिस्थिति में वहां पहुंचीं, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
केजीएमयू यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के तहत करीब डेढ़ करोड़ रुपये की दवाओं के घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू की थी। अब तक तीन संविदा कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। जबकि एक नियमित फार्मासिस्ट को निलंबित किया गया है। इसके अलावा विभागाध्यक्ष को भी पद से हटा दिया गया है। बर्खास्त संविदा कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया जा चुका है। मैनपावर आपूर्ति करने वाली एजेंसी से वसूली की प्रक्रिया चल रही है।