इसके कई रूप
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया: यह सबसे सामान्य प्रकार हैं। यह तब होता है जब नींद में गले की मांसपेशियों की शिथिलता के चलते श्वसनमार्ग आंशिक या पूर्ण रूप से अवरुद्ध होने लगता है, इससे अक्सर लोग जोर से खर्राटे लेते हैं।
सेंट्रल स्लीप एप्निया: ये कम पाया जाता है। इसमें मस्तिष्क सांस लेने को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों को संकेत देने में विफल रहता है। इससे ग्रस्त लोग भी खर्राटे लेते हैं। इसमें सेंट्रल नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है।
कॉम्प्लेक्स स्लीप एप्निया: यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया और सेंट्रल स्लीप एप्निया का मिला-जुला रूप होता है।
कब होती है ज्यादा समस्या
ऐसा रात में कई बार होता है। सुबह के वक्त ज्यादा यह समस्या ज्यादा होती है
कैसे जानें कि स्लीप एप्निया के शिकार हो रहे
इसका प्राथमिक लक्षण है जोर से खर्राटे आना, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, अनियमित दिल की धड़कन, मधमेह आदि। यह पूरी तरह से उपचार योग्य है। कुछ दवाएं, डिवाइस और अंत में सर्जरी के जरिए इसका इलाज किया जाता है।
ये रहे अध्ययन में शामिल
इस शोध टीम में केजीएमयू रेस्पिरेटरी विभाग के डॉ. अभिषेक दुबे, डॉ. दर्शन बजाज, डॉ. स्वाति दीक्षित शामिल रहे। गाइड के रूप में रेस्पिरेटरी विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत, और डॉ. बालेंद्र प्रताप सिंह शामिल रहे। इसे यूरोपियन रेस्पिरेटरी जर्नल ने भी प्रकाशित किया है।
ऐसे किया अध्ययन
राजधानी में दो रीजनल ट्रांसपोर्ट आफिस (आरटीओ) हैं। केजीएमयू की टीम ने यहां लाइसेंस बनवाने आए 542 पर अध्ययन किया। ये सभी पुरुष थे और इनकी उम्र 20 से 50 साल के बीच थी। इनके बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, तंबाकू व शराब पीने जैसी आदतों समेत पूरा ब्यौरा तैयार किया गया। इसके साथ ही खर्राटा लेने, थकान महसूस करने, एप्निया से संबंधित, ब्लड प्रेशर, गर्दन की समस्या, बॉडी मास इंडेक्स के आंकड़े जुटाकर जोखिम का निर्धारण किया गया।
स्लीप एप्निया के साथ ही कई और समस्याएं मिलीं
लाइसेंस बनवाने आए इन लोगों में 23 फीसदी हाई रिस्क वाले पाए गए। यानी ये स्लीप एप्निया से पूरी तरह ग्रसित थे। इसी तरह करीब 40.4 फीसदी ब्लड प्रेशर, 17. 1 फीसदी गर्दन की समस्या से पीड़ित पाए गए, 12.3 फीसदी खर्राटे की समस्या तो 10.5 फीसदी थकान अथवा अनिद्रा के शिकार पाए गए।