केजीएमयू में डायलिसिस की व्यवस्था बेपटरी हो गई थी
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केजीएमयू गहरी नींद में सो रहा था। अस्पताल में लगी 17 डायलिसिस मशीनों में से जब 14 बंद हो गईं और मरीजों को खासी परेशानी हुई। तब उसी नींद टूटी और उसने डायलिसिस मशीन वाली कंपनी को बकाए 60 लाख का भुगतान किया। इसके बाद कंपनी के इंजीनियर अस्पताल गए और डायलिसिस मशीनों की मरम्मत शुरू की। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कल से 10 मशीनों पर डायलिसिस शुरू हो जाएगी।
इससे पहले बुधवार तक स्थिति यह थी कि बकाये का हवाला देकर कंपनी ने 17 में से 14 मशीनें बंद कर दी थीं। इनमें से तीन तो मंगलवार को ही बंद की गईं। ऐसे में पहले जहां रोजाना 50-60 मरीजों की डायलिसिस होती थी, वहीं सिर्फ तीन मशीनों पर नौ मरीजों की डायलिसिस हो पा रही थी।
नेफ्रोलॉजी विभाग में पीएमसी कंपनी ने 2014 में 17 डायलिसिस मशीनें लगाईं। केजीएमयू ने कंपनी के साथ 10 साल का अनुबंध किया। इसके तहत डायलिसिस के लिए कैश काउंटर पर जमा होने वाले रुपये सीधे पंजाब नेशनल बैंक के खाते में जमा होने लगे।
माह के अंत में बैंक से कंपनी और केजीएमयू का हिस्सा अलग-अलग बांट कर खाते में भेज दिया जाता था। केजीएमयू में ई-हास्पिटल व्यवस्था लागू होने से नकद जमा करने की व्यवस्था भी बदल गई। तय किया गया कि कैश काउंटर पर आने वाला पूरा पैसा सीधे केजीएमयू के खाते में जमा होगा और वह कंपनी को उसके हिस्से का भुगतान करेगा।