लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में दिल और फेफड़ा प्रत्यारोपण की सुविधा भी मिलेगी। इसकी सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। ब्रेनडेड व्यक्तियों के अंगदान में मिलने पर इसकी शुरुआत होगी। केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने ये जानकारी दी।
कुलपति ने बताया कि संस्थान के शताब्दी भवन में विशेष ट्रांसप्लांट यूनिट की स्थापना की गई है। यहां अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी सभी सुविधाएं मौजूद हैं। अभी तक यहां कार्निया के साथ ही लिवर और किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध है। अब फेफड़ा और दिल प्रत्यारोपण की सुविधा भी शुरू की जाएगी।
लिवर और किडनी के मुकाबले फेफड़ा और दिल का प्रत्यारोपण इस मायने में अलग है कि इसमें सिर्फ ब्रेनडेड व्यक्ति के ही अंग दान में लिए जा सकते हैं। वहीं, लिवर और किडनी प्रत्यारोपण में मरीज के सगे-संबंधी अंगदान करते हैं। केजीएमयू ने अपने स्तर से तैयारी पूरी कर ली है, ब्रेनडेड व्यक्ति के अंग मिलने पर सुविधा शुरू हो जाएगी।
पिछले सप्ताह हो सकता था दिल का पहला प्रत्यारोपण
केजीएमयू में पिछले सप्ताह दिल का पहला प्रत्यारोपण होते-होते रह गया। संस्थान के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती एक मरीज ब्रेनडेड हो गया था। संस्थान की काउंसिलिंग टीम ने इसके लिए घरवालों की काउंसिलिंग करनी शुरू की। दूसरी ओर, सीटीवीएस विभाग में दिल के प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों की जानकारी जुटाई गई। जांच करने पर एक जरूरतमंद मरीज को चिह्नित किया गया। सभी जरूरी मैचिंग के बाद दिल के प्रत्यारोपण की शुरुआत होनी थी, लेकिन उसी दिन प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीज की मौत हो गई। इसके बाद ब्रेनडेड व्यक्ति का शव उनके परिवार वालों को सौंप दिया गया और पहला प्रत्यारोपण होते-होते रह गया।
अंगदान के लिए जागरूकता का बेहद अभाव
मौजूदा समय में प्रदेश में 40 हजार मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट और 15 हजार को लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत है। अभी तक दिल और प्रत्यारोपण की शुरुआत नहीं हुई है, इसलिए इसके जरूरतमंदों की सूची भी उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2025 में संजय गांधी पीजीआई की ओर से ट्रांसप्लांट डायरेक्ट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, साल भर में हुए 233 प्रत्यारोपण में ब्रेनडेड व्यक्तियों के अंगदान वाले सिर्फ पांच मामले ही रहे। बाकी सभी प्रत्यारोपण जीवित व्यक्ति से अंगदान मिलने पर हुए। केजीएमयू में बीते साल ब्रेनडेड वाले दो व्यक्तियों के अंग प्रत्यारोपित किए गए थे। हालांकि, जरूरत के अनुसार अभी अभी अंगदान की संख्या बेहद कम है।
प्रत्यारोपण में 73 फीसदी हिस्सेदारी निजी अस्पतालों की
एसजीपीजीआई की ओर से प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार, सरकारी क्षेत्र के संस्थानों में दो प्रत्यारोपण के बीच औसत अंतराल 142 दिन का और निजी क्षेत्र में सिर्फ 12 दिन का है। दिसंबर 2020 से लेकर अप्रैल 2023 के बीच प्रदेश भर में 509 प्रत्यारोपण हुए और इनमें से 73.1 फीसदी निजी अस्पतालों में हुए। 509 प्रत्यारोपण में 357 में अंगदान करने वाली महिलाएं हैं।
अंगदान से मिल सकता है दूसरों को जीवन
केजीएमूय में दिल और फेफड़ा प्रत्यारोपण की तैयारी पूरी हो गई है। अगर कोई व्यक्ति ब्रेनडेड हो गया है तो फिर उसके घरवालों को हौसला दिखाना चाहिए। ब्रेनडेड होने के बाद उसके अंगों से किसी जरूरतमंद को नया जीवन मिल सकता है।
- प्रो. सोनिया नित्यानंद, कुलपति केजीएमयू