लखनऊ। केजीएमयू में बुखार से पीड़ित वाराणसी निवासी बीएससी नर्सिंग द्वितीय वर्ष की छात्रा दिव्यांशी की मौत मामले में कार्रवाई की बजाय कोरा आश्वासन मिलने से आहत साथी छात्राएं सोमवार को फिर से धरने पर डट गईं। विद्यार्थियों ने डीन और प्रिंसिपल को हटाने की मांग की है। कहा कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
केजीएमयू की बीएससी नर्सिंग द्वितीय वर्ष की छात्रा की बुखार के दौरान वाराणसी के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई थी। घटना के बाद साथी छात्र-छात्राओं ने नर्सिंग की पढ़ाई और ड्यूटी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। विद्यार्थियों का आरोप है कि बीमार होने के बावजूद छात्र-छात्राओं को अवकाश नहीं दिया जाता। ओपीडी से लेकर वार्ड तक में ड्यूटी लगाई जाती है, जिससे बीमारी की स्थिति में भी उन्हें काम करना पड़ता है। छात्रों ने नर्सिंग हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर भी शिकायत की है। उनका कहना है कि कई बार समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए।
वहीं, केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि छात्रों की उचित मांगों को मान लिया गया है। डीन को हटाने की मांग उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संस्थान प्रशासन की ओर से छात्रों से धरना समाप्त करने की अपील की गई है।
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आश्वासन के बाद स्थगित किया था धरना
मांगों को लेकर छात्र-छात्राएं 21 सितंबर को धरने पर बैठे थे। अगले दिन कुलपति ने छात्रों को वार्ता के लिए बुलाया था। विद्यार्थियों के मुताबिक, उन्हें शनिवार तक मांगों पर निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद उन्होंने धरना स्थगित कर दिया था। धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं का कहना है कि तय समय बीतने के बाद भी उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।
छात्रा की मां ने भी की निष्पक्ष जांच की मांग
मृतक छात्रा की मां ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव और केजीएमयू प्रशासन को शिकायती पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मृतक छात्रा के पिता ने भी धरने पर बैठे विद्यार्थियों के समर्थन में एक वीडियो जारी किया है और जल्द केजीएमयू आकर धरने में शामिल होने की बात कही है।
केजीएमयू में प्रदर्शन करते विद्यार्थी