बालागंज के कारोबारी का बेटा ग्रेजुएशन के दौरान दोस्तों संग चरस लेने लगा। पढ़ाई छोड़ नशे की गिरफ्त में रहने लगा। घर में चोरी करता था। मानसिक रोग विभाग में आने पर सालभर तक दवाएं और काउंसिलिंग चली। अब ठीक होकर एमबीए कर रहा है।
केस-2
गोमती नगर निवासी अधिकारी का बेटा गलत संगत से नशे का इंजेक्शन लेने लगा। परिवार से भी अलग रहने लगा। परिजन उसे मानसिक रोग विभाग लेकर आए। दो साल तक दवाएं चलने के बाद युवक ठीक हो गया है और कारोबार कर रहा है।
केजीएमयू लोगों को नशे की गिरफ्त से भी निकाल रहा है। यहां के मानसिक रोग विभाग में चल रहे नशा उन्मूलन केंद्र में ऑपीऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) के जरिये 110 लोगों को मुख्यधारा में लाने में कामयाबी मिली है। इसे विस्तारित करने की तैयारी चल रही है। मानसिक रोग विभाग में जो शराब सहित अन्य मादक पदार्थों का सेवन करते हैं, उनका भी यहां इलाज हो रहा है।
वहीं, चरस, गांजा, हेरोइन एवं नशीले इंजेक्शन लेने वालों को ओएसटी थेरेपी दी जा रही है। सेंटर की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। इन दिनों राजधानी के 350 मरीज रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 170 मरीज रोजाना विभाग में इलाज करवाने आते हैं। ओपीडी कोविड में भी चली। अब इसे विस्तारित करने की तैयारी है। प्रयास है कि सर्वे कर ऐसे लोगों को केंद्र तक लाया जाए। डॉ. अमित आर्य बताते हैं कि यदि आपके परिवार का सदस्य अकेले में रहने लगे, चीजें गायब होने लगे, वह रात में देर से आता है व कमरा बंद कर लेता है तो सावधान रहने की जरूरत है।