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Lucknow News: केजीएमयू को मिला बच्चों की सर्जरी के उपकरण का पेटेंट, जानें कैसे काम करती है यह डिवाइस ?

Tue, 08 Apr 2025 08:11 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

डॉ. आनंद पांडेय ने बताया कि एसआईबी कार्यक्रम के नोडल कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषि सेठी के माध्यम से इंजीनियर सुमित से मुलाकात हुई थी। चर्चा में इस समस्या का समाधान निकालने की बात हुई। इसके बाद अगस्त 2023 तक कई प्रोटोटाइप बनाए गए। अंतिम प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण किया गया। अब इसे पेटेंट मिल गया है।
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सर्जरी। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) को बच्चों की सर्जरी में सहयोग करने वाली डिवाइस विकसित करने के लिए पेटेंट मिला है। यह डिवाइस बच्चों में मलद्वार बनाने की सर्जरी के दौरान मल नियंत्रण करने वाली मांसपेशी की पहचान करने में मदद करेगी।

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यह पेटेंट पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. आनंद पांडेय, एसआईबी शाइन कार्यक्रम के तकनीकी अफसर इंजीनियर सुमित कुमार वैश्य, पीडियाट्रिक सर्जरी के विभागाध्यक्ष प्रो. जेडी रावत और पूर्व फेलो मोहम्मद जाहिद खान की कोशिशों से संभव हो सका है।

इस समस्या का निकलेगा हल

डॉ. आनंद कुमार पांडेय ने बताया कि हर पांच हजार बच्चों में से एक को जन्मजात बीमारी इम्पेर्फोरेटे ऐनस की समस्या होती है। इसका मतलब है कि बच्चे में मलद्वार नहीं बना होता है। इस दशा में सर्जरी करके मलद्वार बनाया जाता है। सर्जरी के दौरान बच्चे की स्फिंक्टर मसल तलाशनी जरूरी होती है। यह मांसपेशी ही मल को नियंत्रित करने में मददगार साबित होती है।

इसकी वजह से ही व्यक्ति मल को नियंत्रित कर पाता है। मांसपेशी न मिलने पर बच्चे का मल पर नियंत्रण नहीं रहता है। यह समस्या आजीवन बनी रह सकती है। इसी वजह से सर्जरी के दौरान यह मांसपेशी तलाशी जाती है। सर्जरी के दौरान यह मांसपेशी तलाशना मुश्किल काम होता है, जिसे यह डिवाइस आसान बनाएगी। वह मांसपेशी को कुछ क्षण में ही पहचान लेगी। इससे सर्जरी में कम समय लगेगा।

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संस्था के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय मेडिकल इनोवेशन को लेकर सक्रिय है और हर संभव सहायता के लिए तैयार है। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने पूरी टीम को इसके लिए बधाई दी है।

ऐसे काम करती है डिवाइस

यह डिवाइस बैट्री चालित है। इसे बच्चे के मल द्वार के पास रखा जाता है। इसके माध्यम से निकले करंट का प्रभाव मल नियंत्रण वाली मांसपेशी पर पड़ता है, डॉक्टर उसकी पहचान कर लेते हैं। इसे ध्यान में रखकर उसके नीचे मलद्वार बनाया जाता है। इस डिवाइस का इस्तेमाल स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ भी कर सकते हैं। प्रसव के दौरान कई बार मल नियंत्रण मांसपेशी पहचानने की जरूरत पड़ती है। उस स्थिति में यह डिवाइस उपयोगी साबित होगी।

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