चलती ट्रेन से गिरने पर एक युवती का दाहिना हाथ कंधे से अलग हो गया। हाथ की हड्डियां बुरी तरह टूट गई थीं। उसके चिथड़े उड़ गए थे। डॉक्टरी भाषा में इसे एवल्जन इंजरी कहा जाता है। पर, लखनऊ के केजीएमयू के डॉक्टरों ने चमत्कार करते हुए नौ घंटे तक चली सर्जरी में उसका हाथ जोड़ दिया।
ऑपरेशन करीब 61 दिन पहले हुआ था। अब युवती की हालत पहले से काफी बेहतर है। उत्साहित डॉक्टरों का कहना है कि उसके हाथ में जान आने में तकरीबन एक साल लग जाएंगे। खास बात यह है कि इलाज का पूरा खर्च ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर और रेजीडेंट्स ने उठाया। दवा से लेकर 15 यूनिट खून तक का इंतजाम भी खुद किया।
हरदोई, सफियापुर के बेहासार गांव के चिंतू अपनी पत्नी सुशीला और बेटी सोनी (23) दो दिसंबर को चंडीगढ़ जाने के लिए बालामऊ स्टेशन से किसान एक्सप्रेस में सवार हुए। ज्यादा भीड़ होने के चलते सभी दरवाजे के पास ही खड़े थे। इसी बीच, ट्रेन चलने लगी तो धक्का लगने से सोनी गिर गई।
मां ने उसका पैर पकड़ा, लेकिन तब तक प्लेटफॉर्म की चोट से उसका दाहिना हाथ उखड़कर अलग हो गया। बाया हाथ टूट गया। जब तक ट्रेन रुकती, वह खून से लथपथ हो चुकी थी। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से उसे तत्काल ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया।
सुबह सात बजे तक चलता रहा
सोनी का ऑपरेशन करने वाले प्लास्टिक सर्जरी विभाग डॉ. बृजेश मिश्रा ने बताया, रेजिडेंट डॉ. नीरज उपाध्याय ने उन्हें फोन कर बताया कि मरीज की सांस चल रही है। मैंने मरीज के हाथ की फोटो वॉट्सएप से मंगवाई जो बेहद भयावह थी।
सोनी के हाथ के चिथड़े उड़ गए थे। कंधे और हाथ की हड्डी बुरी तरह टूटने के साथ मांशपेशिया फट चुकी थी। रात करीब दस बजे उसकी सर्जरी शुरू हुई और सुबह सात बजे तक उसका हाथ कंधे से जोड़ दिया गया।
संक्रमण का था खतरा
डॉ. बृजेश मिश्रा ने बताया कि एक्स-रे से पता लगाया गया कि हाथ को कितना नुकसान (डॉक्यूमेंटेशन ऑफ फ्रैक्चर) हुआ है। वायरल मार्कर जांच कराई गई तो पता चला कि उसका ऑपरेशन किया जा सकता है। तत्काल सर्जरी शुरू की गई। उन्होंने बताया कि बुरी तरह फट चुकी मांसपेशियों से संक्रमण का खतरा था। इसलिए ऑपरेशन से पहले इन्हें काटकर हटा दिया गया।
काटनी पड़ी हड्डी, छोटा हुआ हाथ
डॉ. बृजेश ने बताया कि टूटी हड्डियों को जोड़ने के लिए ऑर्थो सजर्न की मदद ली गई। बुरी तरह खराब हो चुकी हड्डी का सात सेमी हिस्सा काटकर अलग कर दिया गया। कंधे और हाथ की हड्डी को जोड़ने के लिए एक्सटर्नल फिक्सेटर लगाया गया। फिर नसों व अन्य कोशिकाओं को जोड़कर टांके लगाए गए।
हाथ की हड्डी काटने से सोनी का हाथ दूसरे हाथ के मुकाबले छोटा हो गया है। हालांकि सोनी को अपंगता से बचा लिया गया है। सोनी की देखरेख कर रहे डॉ. नीरज ने बताया कि सोनी की लगातार निगरानी की जा रही है।