फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Health News: अब बिना एमआरआई डिप्रेशन और डिमेंशिया की हो जाएगी पहचान, केजीएमयू के डॉक्टर अपना रहे नई विधि

Wed, 25 Feb 2026 02:15 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Health Update: अब बिना एमआरआई डिप्रेशन और डिमेंशिया की पहचान हो जाएगी। इसके लिए केजीएमयू के डॉक्टर नई विधि अपना रहे हैं। इससे पहले 50 रोगियों पर अध्ययन किया गया है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
डिमेंशिया - फोटो : Freepik.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के वृद्धावस्था एवं मानसिक रोग विभाग ने डिप्रेशन और डिमेंशिया जैसी मानसिक बीमारियों की पहचान के लिए नई विधि अपनाई है। 50 रोगियों पर हुए अध्ययन के बाद अब इन बीमारियों का पता लगाने के लिए एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) के बजाय ईईजी (इलेक्ट्रो एंसेफेलोग्राफी) जांच का उपयोग किया जा सकेगा। निजी विश्वविद्यालय के साथ मिलकर विभाग इसका कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडल भी विकसित कर रहा है।

विज्ञापन


वृद्धावस्था एवं मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. श्रीकांत श्रीवास्तव ने बताया कि डिप्रेशन के शुरुआती चरण में पहचान होने पर इसका इलाज संभव है। वहीं, डिमेंशिया जैसी घातक बीमारी का इलाज अभी उपलब्ध नहीं है। दवाओं के माध्यम से सिर्फ इसकी प्रगति रोकी जा सकती है। ईईजी एक गैर आक्रामक जांच है, जो मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि रिकॉर्ड करती है। यह एमआरआई की तुलना में कम समय लेती है और इसकी लागत भी कम होती है।

इस नई विधि से मरीजों को एमआरआई की लंबी प्रतीक्षा सूची से मुक्ति मिलेगी। ईईजी जांच ग्रामीण और छोटे शहरों में भी आसानी से उपलब्ध हो सकती है, जिससे व्यापक पहुंच सुनिश्चित होगी। यह मस्तिष्क में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों का पता लगाने में सक्षम है, जो डिप्रेशन और डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों को पहचानने में सहायक है।

एप के माध्यम से मिलेगा लोगों को फायदा

डॉ. श्रीकांत शर्मा के मुताबिक, देश में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। डिमेंशिया आमतौर पर 60 वर्ष से बाद की बीमारी है। लगभग हर घर में एक बुजुर्ग होते हैं। ऐसे में मोबाइल एप से दूरदराज के क्षेत्रों में भी निदान की सुविधा पहुंचाई जा सकेगी, जिससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी। यह तकनीक मरीजों को समय पर उपचार प्राप्त करने में मदद करेगी और देश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें