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Lucknow News: डॉक्टरी महंगी है...यह सोचकर पॉलीटेक्निक में चाहते थे दाखिला, पर बदला इरादा, आज हैं एमसीएच के टॉपर

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लखनऊ। चेन्नई के छोटे गांव में रहने वाले मनिगंडन बचपन से ही मेधावी थे। शुरू से सपना था कि डॉक्टर बनें, लेकिन सुना था कि इसकी पढ़ाई बहुत महंगी है। घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। ऐसे में वह पॉलीटेक्निक में दाखिला लेकर नौकरी करना चाहते थे। हाईस्कूल में 96 फीसदी अंक प्राप्त करने के बाद मामा के साथ पॉलीटेक्निक में दाखिला कराने भी पहुंच गए, लेकिन दाखिला देने वालों ने ही डॉक्टरी या इंजीनियरिंग पढ़ने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने अपने पसंदीदा लक्ष्य की ओर रुख किया और एक के बाद एक सफलता की सीढ़ी चढ़ते हुए आज केजीएमयू जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा विवि में एमसीएच के टॉपर बन गए हैं। केजीएमयू में 23 दिसंबर को होेने वाले दीक्षांत समारोह में डॉ. मनिगंडन कुप्पुस्वामी को एमसीएच में टॉप करने पर डॉ. बीआर अग्रवाल मेमोरियल गोल्ड प्रदान किया जाएगा। आर्थिक तंगी के बीच सफलता के इस सफर को उन्होंने अमर उजाला के साथ साझा किया।
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मद्रास मेडिकल कॉलेज में मिला दाखिला
डॉ. मनिगंडन कहते हैं कि मैं बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा था। प्लंबरिंग का काम करने वाले पिता कुप्पूस्वामी व मां मंजुला (गृहिणी) मुझे इस लायक बनाना चाहते थे कि मैं नौकरी कर सकूं। इसके लिए मैंने सोचा कि हाईस्कूल कर पॉलीटेक्निक में दाखिले ले लूं, ताकि आसानी से नौकरी मिल जाए और घर का आर्थिक संकट दूर हो जाए। मेरे मामा मुझे पढ़ाते थे। उनके प्रोत्साहन पर मैंने खूब मेहनत की और हाईस्कूल में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद हम लोग पॉलीटेक्निक में दाखिला लेने पहुंचे तो दाखिला देने वालों ने इतने अच्छे अंक देखकर कहा कि पॉलीटेक्निक में भविष्य बर्बाद करने के बजाय मेडिकल या इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की सलाह दी। इसके बाद स्कूल के एक ट्रस्टी जो कि खुद डॉक्टर थे, उन्होंने 12वीं में दाखिला दिला दिया। 12वीं में 94 फीसदी अंक लाने पर स्कूल ट्रस्ट की ओर से मेडिकल की पढ़ाई की पूरी फीस भरने की व्यवस्था भी कराई गई। मद्रास मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से एमएस की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान खुद को आर्थिक रूप से सक्षम करने के लिए बीच-बीच में नौकरी भी की। एमएस पूरा करने के बाद एमसीएच के लिए केजीएमयू में दाखिला लिया। इस समय दो साल की फेलोशिप के लिए केजीएमयू में ही हूं।
मेहनत करें, महंगी नहीं है मेडिकल की पढ़ाई
डॉ. मनिगंडन खराब आर्थिक स्थिति वाले विद्यार्थियों को मेहनत करने की सलाह देते हैं। वह कहते हैं कि छात्र यह न सोचें कि मेडिकल की पढ़ाई बहुत महंगी है। सरकारी संस्थानों में अभी भी इसकी फीस काफी कम है। यदि वे अच्छी रैंक हासिल कर सरकारी संस्थान में दाखिला ले लेंगे तो डॉक्टर बन सकते हैं। इसमें आर्थिक स्थिति बाधा नहीं बनेगी। डॉ. मनिगंडन ने कहा कि जब वह डॉक्टर बन सकते हैं तो मेहनत करने वाला कोई भी छात्र डॉक्टर बन सकता है। डॉ. मनिगंडन ने अपनी सफलता के लिए मां-पिता और मामा के साथ ही केजीएमयू के प्रो. एके सिंह, प्रो. विजय कुमार, डॉ. ब्रजेश मिश्रा और डॉ. डीएन उपाध्याय को विशेष रूप से धन्यवाद दिया है।
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भाषा ने पैदा की समस्या, पर भा गया लखनऊ
डॉ. मनिगंडन ने बताया कि उनकी पढ़ाई तमिल माध्यम में हुई थी। इसलिए जब एमबीबीएस में दाखिला लिया तो पहले छह महीने बहुत समस्या हुई। इसके बाद लगा कि सब ठीक है, लेकिन जब दिल्ली में एमएस करने पहुंचे तो हिंदी न जानने पर और भी समस्या हुई। करीब छह महीने बाद स्थिति सामान्य हुई। हालांकि, एमएस के बाद जब लखनऊ पहुंचे तो यहां पर बहुत ही अपनापन महसूस हुआ। यहां पर लोग मिलने-जुलने तथा मदद करने वाले लगे।
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