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Lucknow News: ज्ञान हासिल किया, अब सेवा की बारी

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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह में रविवार को डॉक्टरों की नई पौध का पदक और डिग्री देकर सम्मान किया गया। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेधावियों से कहा कि ज्ञान हासिल करने के बाद अब मरीजों के इलाज और सेवा करने की उनकी बारी है। दीक्षांत समारोह में विवि का सबसे प्रतिष्ठित हीवेट पदक अक्षिता विश्वनाद्या और चांसलर मेडल लिपिका अग्रवाल को दिया गया।
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मुख्य अतिथि के रूप में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव डॉ. अभय करंदीकर उपस्थित रहे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने समारोह की अध्यक्षता की। डॉ. अभय करंदीकर के साथ ही केजीएमयू के पूर्व कुलपति प्रो. महेंद्र भंडारी को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान अक्षिता को हीवेट समेत 10 पदक, लिपिका अग्रवाल को चांसलर समेत 12 पदक, प्रांजलि सिंह को बीडीएस में टॉप करने पर 11 पदक, डॉ. नेहा कुमारी को एमडी-एमएस में टॉप करने पर दो पदक दिए गए। कुल 38 मेधावियों को मेडल और एक शिक्षक को लाइफटाइम अचीवमेंट अवाॅर्ड से नवाजा गया। कुल 72 पदक प्रदान किए गए जिसमें से 26 छात्राओं ने 59 पदक पाए और 12 छात्राओं के हिस्से एक-एक पदक आया। वहीं 1869 छात्र-छात्राओं की डिग्री राज्यपाल ने बटन दबाकर इनकी डिजि लॉकर पर अपलोड कीं।
मेधावियों के साथ उनके अभिभावकों का भी अभिनंदन
राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह के दौरान पदक पाने वाले मेधावियों के साथ ही उनके अभिभावकों, शिक्षकों व स्टाफ का भी अभिनंदन किया। हीवेट मेडल विजेता अक्षिता के लिए सभागार में मौजूद हर व्यक्ति ने खड़े होकर तालियां भी बजाईं।
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फोटो-

शरीर के कई रहस्यों तक अब भी नहीं पहुंच पाई है एलोपैथी
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि एलोपैथी अब भी शरीर के कई रहस्यों का पूरी तरह से पता नहीं लगा सकी है। दूसरी ओर भारतीय चिकित्सा पद्धति में काफी पहले सर्दी-जुकाम और बुखार का भी विस्तृत वर्गीकरण है। भारतीय चिकित्सा पद्धति में शोध और प्रचार-प्रसार की जरूरत है। राज्यपाल ने कहा कि चरक संहिता में सामान्य बीमारियों के साथ ही डायबिटीज, दिल और टीबी जैसी बीमारियों के बारे में भी काफी पहले बताया जा चुका है। इस पर काम किया जाए तो बेहतर इलाज के रास्ते खुलेंगे। मेधावियों से उन्होंने कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद अब अर्जित ज्ञान का लाभ समाज को देने की बारी है। उन्होंने डॉक्टरों से मानसिक चिकित्सा पर भी काम करने को कहा। विद्यार्थियों में महिला डॉक्टरों की संख्या ज्यादा होने पर उन्होंने कहा कि उनका आगे आना समाज के नैतिक विकास की पहचान है। कहा, पुरुषों के मुकाबले वे ज्यादा संवेदनशील होती हैं, इसलिए चिकित्सा क्षेत्र में ज्यादा सफल भी साबित हो सकती हैं।





लेने नहीं बल्कि देने वाले बनें

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. अभय करंदीकर ने मेधावियों से कहा कि वे लेने वाले नहीं बल्कि देने वाले बनें। नए डॉक्टरों से उन्होंने शोध करने, मरीजों के प्रति करुणा और समर्पण रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि तकनीकी संस्थानों के साथ मेडिकल इंस्टीट्यूशन्स के एमओयू के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।



नई बीमारियों पर करें शोध

दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि से सम्मानित किए गए केजीएमयू के पूर्व कुलपति व यूरोलॉजिस्ट प्रो. महेंद्र भंडारी ने कहा कि कोरोना के बाद नई-नई बीमारियां जन्म ले रही हैं। इनसे निपटने के लिए शोध जरूरी है। प्रो. भंडारी ने शिक्षकों से कहा कि छात्रों को उन ऊंचाइयों तक पहुंचने में मदद करें जहां वे खुद नहीं जा सके हैं। उन्होंने बीते समय को याद करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कंवेंशन सेंटर के निर्माण के लिए उनको फुटबाल ग्राउंड देना पड़ा था और आज इसी भव्य सेंटर में यह आयोजन हो रहा है।




बातचीत-
हीवेट मेडल सपना साकार होने जैसा

केजीएमयू का सर्वश्रेष्ठ हीवेट मेडल पाना कोई सपना साकार होने जैसा है। इस समय इंटर्नशिप चल रही है। मेरा मकसद बाल रोग विशेषज्ञ बनना है।

अक्षिता विश्वनाद्या- हीवेट समेत 10 पदक



पूरी उम्मीद थी चांसलर पदक की

जिस तरह से मेरे नंबर थे, उससे पूरी उम्मीद थी कि चांसलर पदक जरूर मिलेगा। पदक पाकर और ज्यादा मेहनत करने की प्रेरणा मिली है। आगे चलकर मैं बाल रोग विशेषज्ञ बनना चाहती हूं।

लिपिका अग्रवाल- चांसलर समेत 12 पदक




वाराणसी में कैंसर मरीजों के लिए करूंगी काम

डेंटल सर्जन बनकर मरीजों के लिए काम करना चाहती हूं। मैं वाराणसी से हूं और उस क्षेत्र में मुंह के कैंसर वाले काफी मरीज आते हैं। डेंटल सर्जन बनकर उनका इलाज करना चाहती हूं।

प्रांजलि सिंह- बीडीएस टॉपर के लिए 11 पदक



मेडल पाकर संकल्प हुआ दृढ़

एमबीबीएस करने के बाद कम्युनिटी मेडिसिन मेरी पहली पसंद थी। इसके माध्यम से समाज से सीधे तौर पर जुड़कर कुछ करना चाहती थी। मेडल पाकर मेरा संकल्प और दृढ़ हुआ है।
- डॉ. प्रत्यक्षा पंडित, एमडी कम्युनिटी मेडिसिन में दो पदक




अन्य पदक पाने वाले मेधावी-
अक्षरकांत, डॉ. बिर्निका नाथ, डॉ. पारुल सोहने, डॉ. साक्षी त्यागी, डॉ. प्रज्ञा मिश्रा, डॉ. रजत चौधरी, डॉ. किसलय कमल, डॉ. हिमांशु मिश्रा, डॉ. स्वाति श्रीवास्तव, डॉ. सुरभि रामपाल, डॉ. प्रज्ज्वल दास, डॉ. अनुराधा देओल, डॉ. चेतना भट्ट, डॉ. दुर्गा सिंह, डॉ. मोहन लाल जाट, डॉ. आस्था यादव, डॉ. ईशा मक्कड़, डॉ. शिवांगिनी सिंह, डॉ. आदित्य अग्रवाल, डॉ. अनिकेत रस्तोगी, डॉ. प्रत्यक्षा पंडित, डॉ. अजित कुमार मिश्रा, डॉ. नबिला निशात, डॉ. प्रियांशी स्वरूप, डॉ. रुचि अग्रवाल, डॉ. प्राची, डॉ. मो.जोहैब अब्बास, डॉ. एस एजिलारसी, डॉ. मोहन चंद्रकांत महाजन, डॉ. ज्योति सोलंकी, डॉ. अन्वेश कुमार, डॉ. नीतिका दीवान।
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नर्सिंग संकाय में पदक- स्नेहा एंजेल सोलोमन।



फैकल्टी पदक- प्रो. राकेश शुक्ला।
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