लखनऊ। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अब भारत और अमेरिका आपसी सहयोग के साथ आगे बढ़ेंगे। भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक प्रो. अखलेश लखटकिया ने भारत के छात्रों को कुशल बनाने व व्यावहारिक विशेषज्ञता हासिल करने के लिए एक पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसमें भारत में पढ़ाई के बाद अमेरिका में कॅरिअर बनाने की सोच रहे छात्रों को मदद मिलेगी।
लखनऊ निवासी प्रो. लखटकिया को भारत-अमेरिका शैक्षिक संबंधों के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में इंडो-यूएसए संबंधों पर एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी की ओर से आमंत्रित विशेष व्याख्यान दिया। इस व्याख्यान के बाद उनके साथ हुए सवाल-जवाब को सोशल मीडिया नेटवर्क पर पोस्ट किया गया। इसमें उन्होंने बताया कि भारतीय छात्रों को अमेरिका में मौका देने के लिए यह विशेष कोर्स डिजाइन किया गया है। इस कोर्स में पहले चार साल तक स्टूडेंट भारत में पढ़ाई करेगा। अंतिम वर्ष की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका जाएगा। इस पाठ्यक्रम के अनुसार, भारत में इंजीनियरिंग समेत अन्य पाठ्यक्रमों के तीसरे वर्ष के दौरान दाखिले के लिए आवेदन किया जाएगा। भारत में कोर्स के चौथे साल के दौरान वीजा व अन्य जरूरी प्रक्रिया पूरी होंगी। इसके बाद छात्र अमेरिका चला जाएगा। अमेरिका में आमतौर पर दो साल के पीजी पाठ्यक्रम के लिए 30 क्रेडिट हासिल करने होते हैं। इस कोर्स में 30 क्रेडिट सिर्फ एक साल की अवधि में ही पूरे करने होंगे। ये क्रेडिट हासिल करने के बाद छात्र अमेरिका में तीन साल की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के योग्य हो जाएंगे। इस दौरान उनको इतना वेतन मिलेगा जिससे वे अपना एजुकेशन लोन आसानी से चुका सकते हैं। तीन साल के बाद वे अमेरिका के साथ ही भारत में नौकरी और खुद का व्यवसाय कर सकते हैं। इस कार्यक्रम के लिए अमेरिका की पेन स्टेट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और कॉलेज ऑफ अर्थ एंड मिनरल साइंसेज के साथ सहमति बनी है। प्रो. लखटकिया ने आईआईआईटी बीएचयू से पढ़ाई की है। इसके बाद वे पेंसेलवेनिया विवि में पढ़ाते हैं।
भारत में सिर्फ 27 फीसदी विद्यार्थी हासिल करते हैं उच्च शिक्षा
प्रो. लखटकिया ने बताया कि भारत में उच्च शिक्षा में सिर्फ 27 फीसदी विद्यार्थी ही भाग लेते हैं। जबकि चीन में यह प्रतिशत 52 फीसदी और अमेरिका में 89 फीसदी है। अमेरिका में अब जबकि स्थानीय आबादी कम हो रही है, उसे देखते हुए प्रयास है कि इंडस्ट्री के लिए प्रशिक्षित युवाओं को आकर्षित किया जाए। भारत में शिक्षा के स्तर और अमेरिका के साथ बेहतर संबंधों को देखते हुए इस पाठ्यक्रम का फोकस भारतीय युवाओं पर किया गया है।