केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने बड़ी आंत से यूरिनरी ब्लैडर बनाकर मरीज में ट्रांसप्लांट कर दिया। 60 से अधिक मरीजों में इसका सफल प्रत्यारोपण किया जा चुका है।
उनके इस कारनामे को ब्रिटिश जरनल ऑफ यूरोलॉजी और साउथ एशियन जरनल ऑफ कैंसर ने कवर पेज पर जगह दी है। अभी तक विश्व भर में छोटी आंत से ही यूरिनरी ब्लैडर बनाए जा रहे थे।
केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग ने यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर से जूझ रहे मरीजों को एक विकल्प उपलब्ध करा दिया है। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. एसएन शंखवार और प्रो. विश्वजीत ने बताया कि कैंसर के कारण यूरिनरी ब्लैडर को सर्जरी कर हटाना पड़ता है। ऐसे में मरीज के शरीर से बाहर एक पाउच लगा दिया जाता है।
जिसमें यूरिन इकठ्ठा होता है। इस पाउच (कांड्यूल) की वजह से मरीज के शरीर से बदबू आती रहती है और उसके भर जाने पर उसे खाली भी करना होता है। मरीज को इसी दिक्कत से बचाने के लिए उसकी बड़ी आंत के 40 सेंटीमीटर हिस्से को काटकर यूरिन ब्लैडर बनाया जाता है और उसे यूरेटर से जोड़ दिया जाता है।
इसमें तीन सप्ताह के बाद मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है और सामान्य लोगों की तरह ही मूत्र त्याग करता है। प्रो. विश्वजीत ने बताया कि आंत से बने ब्लैडर की खासियत यह होती है कि ये पेशाब की थैली की तरह कार्य करता है। इस ब्लैडर की कार्यप्रणाली की जांच यूरोडायनमिक मशीन से की जाती है।