कादंबिनी क्लब की ओर से शनिवार को गोमतीनगर में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन
हुआ।
मुख्य अतिथि व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी रहे। अतिथियों में पूर्व
आईएएस डॉ. शंभूनाथ, प्रो. उषा सिन्हा भी रहीं। हास्य कवि सर्वेश अस्थाना ने
रिश्तों में तकरार बहुत है, फिर भी इनमें प्यार बहुत है...सुनाया।
डॉ.
शंभूनाथ ने, न बदले तुम न बदले हम.. रचना सुनाई। व्यंग्यकार गोपाल
चतुर्वेदी ने धुआं धुआं सा मन में इंतजार है, धूप कभी आए मेरे आंगन में..
सुनाया।
तो वाहिद अली वाहिद ने व्यंग्य रचना गुण से हीन लोगों को भगवान लिख
दूं क्या.. से रंग जमाया। डॉ. मांडवी चंद्रा, डॉ. रेखा गुप्ता, डॉ. मंजू
शुक्ल, त्रिवेणी प्रसाद गुप्ता, कनक वर्मा, विजय लक्ष्मी, डॉ. मिर्जा हसन
नासिर, अलका प्रमोद ने भी रचनाएं सुनाईं।
बख्शी दीदी ने सन्यासी का संतूर
गीत कहानी पढ़ी। उनकी सुनाई रचना नदी किनारे योगी आया मन मस्ताना था, डूब
रहा था सूर्य गगन में समय सुहाना था खूब सराही गई। डॉ. मधु चतुर्वेदी ने
व्यंग्य कविता जी हां मैं पालतू हूं सुनाई।