जेहि गिरि चरन देई हनुमंता, चलउ सो गा पाताल तुरंता... सुंदरकांड की ये चौपाई सब अरसे से पढ़ते चले आ रहे हैं, लेकिन जल्द ही लोग इसे कथक के जरिये मंच पर देख सकेंगे।
ये पहला अवसर होगा जब सुंदरकांड कथक में ढलेगा। इसके लिए नगर के प्रख्यात कथक गुरु पं. अर्जुन मिश्रा की प्रमुख शिष्या नृत्यांगना सुरभि सिंह टंडन जोर-शोर से तैयारी में जुटी है।
अपने विदेश दौरे पर रवाना होने से पहले सुरभि ने बताया कि विगत दो महीनों से इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। कोलकाता के असीम बंधु भट्टाचार्या के सहयोग से गायन समेत तमाम तकनीकी पक्षों पर काम हो चुका है।
चूंकि सुंदरकांड को कथक के रूप में एक घंटे में तो नहीं समेटा जा सकता है, इसलिए कुछ संपादन भी किया गया है। तकनीकी पक्ष पूरा तैयार है। जल्द ही रिहर्सल भी शुरू होगी। अक्टूबर में प्रस्तुति की तैयारी है।
एक घंटे की प्रस्तुति में उनके साथ 10 अन्य नृत्यांगनाएं भी साथ होंगी। सुरभि ने बताया कि उनका प्रयास है कि विश्व के जिन 80 छोटे-बड़े देशों में जहां रामायण पढ़ी जाती है, वहां सुंदरकांड की ये प्रस्तुति पहुंचाई जाए।
मालूम रहे कि इससे पहले नगर में 2010 में हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला पर भी कथक प्रस्तुति हो चुकी है।
विदेशों में चमक बिखेरगी नगर की विरासत
नगर की विरासत कथक पर बनने वाली एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म में प्रख्यात कथक गुरु पं. अर्जुन मिश्र अभिनय-प्रस्तुति करते दिख सकते हैं। इसके लिए वे अपने करीब दो सप्ताह के दौरे पर यूरोप भी रवाना हो चुके हैं।
कथक एकेडमी और एएडीसी की ओर से विदेशों में होने वाली प्रस्तुतियों के दौरान कथक गुरु कैमरे के सामने दिखेंगे। उनकी प्रमुख शिष्या सुरभि ने बताया कि दल में गुरुजी के साथ वे खुद, नर्तक पं. अनुज मिश्र, स्मृति, जागृति मिश्र भी प्रमुख प्रस्तुतियों के लिए जा रही हैं।
सुरभि ने बताया कि बताया कि इस दौरान दल स्विट्जरलैंड, कनाडा, पेरिस आदि स्थानों पर प्रस्तुतियां देगा। साथ ही लखनऊ शहर के कथक पर बनने वाली एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म में गुरुजी भी कैमरा फेस कर सकते हैं।