लखनऊ। राष्ट्रीय कथक संस्थान की ओर से बृहस्पतिवार को ऑनलाइन कथक संध्या ‘नृत्य झंकार’ का आयोजन किया गया, जिसका फेसबुक पर सीधा प्रसारण किया गया। कथक संध्या में पहली प्रस्तुति ‘नमामिशमीशान’ रही। इसके बाद शुद्ध नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें तीन ताल की विलम्बित लय ने आमद, उठान, सलामी तथा मध्य लय में नट्वरी टुकडे़ तिहाई और कविता के साथ प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का समापन तराना से हुआ, जो राग भैरवी ताल, तीन ताल पर आधारित है। तराना एक फारसी भाषा का शब्द है। तराना में निरर्थक शब्द का प्रयोग होता है, जिसे कथक नृत्य के बोलों के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। मंच पर हुमा साहू, संजीवनी नाथ, श्रेया केसरवानी ने प्रस्तुति दी। परिकल्पना सरिता श्रीवास्तव की रही।