फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कटेहरी उपचुनाव परिणाम: सीएम ने खुद बनाई रणनीति, संगठन ने इस तरह रची जीत की इबारत, निषाद वोटों की अहम भूमिका

Sat, 23 Nov 2024 07:15 PM IST
रोहित मिश्र अभिषेक राज, अमर उजाला, लखनऊ

सार

Katehari By Election Result: कटेहरी उपचुनाव में भाजपा को 31 साल के बाद जीत मिली है। इस जीत का श्रेय सीएम योगी को दिया जा रहा है। उनकी रणनीति ने पार्टी को जीत दिलाई है। 
विज्ञापन
कटेहरी उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कटेहरी उपचुनाव में भाजपा ने डबल इंजन की ताकत दिखा दी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने जीत की जो राह सुझाई उसे संगठन ने आत्मसात किया और करके भी दिखा दिया। शांति से...। कुशलता से...। सपा के आरोपों को दरकिनार करते हुए अंत तक नजर बस लक्ष्य पर ही टिकी रही। ऐतिहासिक जीत के रूप में परिणाम सुखद रहा। संतुष्ट करने वाला रहा। नए संदेश के साथ समीकरण साधने वाला भी।

विज्ञापन


अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंडल का यह पहला उपचुनाव रहा। ऐसे में फैजाबाद संसदीय सीट हारने के बाद कटेहरी को भाजपा ने प्रतिष्ठा से जोड़कर जीत की रणनीति बनाई। कमान खुद सीएम योगी ने संभाली। पहले संगठन को साधा और फिर प्रत्याशी के चयन को लेकर पार्टी नेताओं में चल रहे मनमुटाव को दूर किया। 

जातीय समीकरण को संतुलित किया। इस सबके बाद बसपा के काडर वोटरों में मजबूत पैठ रखने वाले धर्मराज निषाद को मैदान में उतारा। आंतरिक कलह की आशंका को जड़ से समाप्त करने के लिए बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से खुद मिले। दावेदारों को बात कर संतुष्ट किया। किलेबंदी के बाद ताबड़तोड़ पांच सभाएं कर सपा के साथ ही बसपा को भी चौंकाया। हर बार सीएम का संदेश साफ रहा...जीत...जीत और सिर्फ जीत...। अंबेडकरनगर के विकास के लिए जीत को जरूरी बताया। सीएम की बात मतदाताओं तक पहुंची और उन्होंने मतदान के समय इसे दिखाया भी।
विज्ञापन


वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बाद भी कटेहरी सीट पर जीत नहीं मिल सकी थी। यहां बसपा से सपा में शामिल हुए कद्दावर पूर्व मंत्री लालजी वर्मा ने भाजपा गठबंधन से निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अवधेश कुमार को 7,696 मतों के अंतर से हरा दिया। लालजी वर्मा को कुल 93,542 मत मिले तो निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) को 85,828 मतों से संतोष करना पड़ा था। बसपा के प्रतीक पांडेय को 58,482 मत मिले। तब कुल 10 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, जिनमें दो महिलाएं भी थीं। कटेहरी के मतदाताओं ने सात प्रत्याशियों की जमानत भी जब्त करा दी थी।

विज्ञापन

उपचुनाव में दलित, निषाद के साथ सवर्णों ने भी दिया भाजपा का साथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
उपचुनाव के प्रचार के दौरान सीएम योगी के बटेंगे तो कटेंगे का संदेश आम मतदाताओं तक सीधे पहुंचा। इसका असर परिणाम के रूप में भाजपा के पक्ष में भी शनिवार को दिखा। आशंका के विपरीत दलित व निषाद मतदाता कटे नहीं बल्कि भाजपा में आकर सटे। इसमें साथ निभाया सवर्ण मतदाताओं ने और पार्टी प्रत्याशी धर्मराज निषाद ने इतिहास रच दिया। उन्होंने भाजपा का 33 वर्ष बाद कमल खिला दिया। इससे पहले वर्ष 1991 में यहां से भाजपा के अनिल तिवारी जीते थे। तब से पार्टी को यहां से जीत नहीं मिल सकी।

कटेरी के जातीय समीकरण को देखें तो करीब 95 हजार दलित निर्णायक साबित होते हैं। 65 हजार कुर्मी भी इकतरफा मतदान करते हैं। 50 हजार ब्राह्मण मतदाता भी हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। 40 हजार मुस्लिम व 30 हजार निषाद कद्दावरों का कद तय करते हैं। उपचुनाव में भाजपा ने सभी को साधने की पूरी कोशिश की। सीएम योगी खुद ब्राह्मण नेताओं से मिले। निषाद मतदाताओं को पक्ष में करने के लिए धर्मराज के रूप में निषाद प्रत्याशी उतारा। इसमें खास बात यह रही कि धर्मराज निषादों के साथ ही दलितों में भी अच्छी पैठ रखते हैं। पार्टी ने बूथवार रणनीति तैयार कर मार्चेबंदी की और जीत के लिए हर जरूरी जतन किए। शनिवार को भाजपा के पक्ष में परिणाम सुखद भी रहा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें