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वारदातः यात्रियों को शौचालय में बंद कर ये अपराध करता था कश्मीरी लुटेरा

Mon, 18 Jul 2016 01:23 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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कश्मीरी लुटेरा हयात मोहम्मद - फोटो : amar ujala
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मुसाफिर बनकर रेलवे स्टेशनों की डॉरमेट्री में यात्रियों का सामान पार करने वाला शातिर कश्मीरी हयात मोहम्मद शौकत रविवार को जीआरपी के हत्थे चढ़ गया। सर्विलांस की मदद से आरोपी को चारबाग रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार किया गया। 
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शातिर ने यूपी ही नहीं एमपी, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के दर्जनभर जिलों में स्टेशनों पर वारदातें की हैं। उसके पास से दर्जनभर से अधिक मोबाइल फोन, एक्टीवेटेड सिम, कैमरा, कटर, प्लास, फर्जी आईडी व दस हजार रुपये बरामद किए हैं।

(जम्मू-कश्मीर) निवासी हयात मोहम्मद शौकत पुत्र अब्दुल गनी वर्तमान में 46 सब्जीमंडी, शाहगंज इलाहाबाद में रहता है। बीते आठ जून को स्टेशन की एसी डॉरमेट्री से डॉ. महेश जैन व एडवोकेट राजीव रंजन का सामान चोरी हो गया था।
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इसके बाद चलाए गए अभियान में शौकत को दोपहर सवा एक बजे स्टेशन के बुकिंग हॉल सेकंड के सामने वाली सड़क से गिरफ्तार कर लिया गया।

शौकत ने यूपी में लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद व झांसी, एमपी में भोपाल, कटनी, महाराष्ट्र में नांदेड़, शोलापुर, नागपुर व औरंगाबाद, आंध्र प्रदेश में हैदराबाद, तमिलनाडु मेंचेन्नई स्टेशनों पर डॉरमेट्री से सामान चोरी किया है।

ये मामले भी दर्ज हैं। जीआरपी इंस्पेक्टर डीके उपाध्याय ने बताया कि शौकत डॉरमेट्री में खुद यात्री बनकर जाता था और शौचालय का इस्तेमाल करने वालों को बाहर से लॉक कर सामान लेकर चंपत हो जाता था। वह अपने साथ नायलॉन का बैग लेकर चलता था। इसमें यात्रियों का सामान रख लेता था।

चेक में हेरफेर करने की रची साजिश

डेमो ‌पिक
ताकि सीसीटीवी कैमरे में पकड़ा न जा सके। शौकत के पिता कश्मीर में रिटायर्ड अध्यापक हैं व भाई अच्छे पदों पर हैं। पूछताछ में शौकत ने बताया कि पिता एक राष्ट्रीय पार्टी के नेता हैं। इसके चलते आए दिन उग्रवादियों से झड़पें होती थीं। 

कश्मीर में रहना मुहाल हो गया था। इसलिए इलाहाबाद आ गया था। इतना ही नहीं प्रदेश के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव के नाई की शॉप पर 1991 से लेकर कई वर्षों तक काम किया है। 

ब्रीफकेस, 14 मोबाइल फोन, घड़ी, मैजिकल पेन, कैमरा, फर्जी आईएमईआई स्लिप व बिल बनाने के उपकरण, 40 एक्टीवेटेड सिम, फर्जी आईडी प्रूफ, कटर, प्लास बरामद किए गए हैं। मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है। 

न्यूज चैनल पर फर्जी चेक से लाखों डकारने की खबर देखने के बाद हाईस्कूल फेल शौकत ने चेक में हेरफेर करने की साजिश रची। वह होटलों में साबुन, तौलिया, कंघे का ऑर्डर लेकर पोस्ट डेटेड चेक लेता था। उन चेकों पर मैजिक पेन के जरिये ओवरराइटिंग कर बैंकों को चपत लगाता था। 

एचडीएफसी, ओबीसी, पीएनबी व इलाहाबाद बैंक को लाखों रुपयों का चूना लगाया। पर, मुंबई में एक दुकान पर बैग भूल गया। इसमें फर्जी आईडी व सिमकार्ड थे, जो दुकानदार ने थाने में जमा करवा दिए थे। जब सामान लेने पहुंचा तो दबोच लिया गया।
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पहले चेक में हेरफेर की तो कर लिया गया गिरफ्तार

डेमो ‌पिक
शौकत 1989 में घर छोड़कर भाग गया था। करीब दस साल तक ड्राईफ्रूट्स बेचे। इसके बाद वह ट्रांसपोर्ट के बिजनेस में आया। इस दौरान इलाहाबाद में एक ऑर्केस्ट्रा में उसने दोस्त बनाया और बाद में उसकी बहन शाहिदा से निकाह कर लिया। 

चार बच्चे हुए और खर्चे बढ़े तो अपराध शुरू कर दिए। पहले चेक में हेरफेर की तो गिरफ्तार कर लिया गया। छूटने पर डॉरमेट्री से यात्रियों का सामान चुराने लगा। जबकि शौकत ने कुबूला कि भाइयों ने प्रॉपर्टी हथिया ली। इससे लाखों रुपये की उधारी हो गई। इसलिए अपराधी बना।

उपनिरीक्षक ज्ञान सिंह ने बताया कि शौकत के पास से फर्जी मोबाइल बिल, आईएमईआई स्लिप, मोहरें, एक्टीवेटेड सिम मिले हैं। शौकत मोबाइल चुराता था, उसकी फर्जी रसीद बनाता और आईएमईआई स्लिप चिपकाकर उसे असली शक्त देता। इससे मोबाइल फोन की अच्छी कीमत मिल जाती थी।

उपनिरीक्षक अजीत कुमार शुक्ला ने बताया कि शौकत डॉरमेट्री से यात्रियों का सामान पार करने के बाद कीमती वस्तुएं निकाल लेता था, लेकिन डॉक्यूमेंट्स स्पीडपोस्ट से यात्री के एड्रेस पर भेज देता था। अपराध की कमाई से शौकत हवाई यात्राएं करता और महंगे होटलों में ठहरता था। 

गुडवर्क में शामिल टीम को पुलिस अधीक्षक सोनिया सिंह की ओर से पांच हजार रुपये का पुरस्कार घोषित किया गया है। टीम में उपनिरीक्षक ज्ञान सिंह, अजीत शुक्ला, हेड कांसटेबल मुनींद्र कुमार व शिवबहादुर, सिपाही राजबहादुर, इंद्रजीत, अजय कुमार, जीएन सोनकर, राजेश कुमार, मोहम्मद कादिर, सुंदर सिंह थे। 
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