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आर्थिक संसाधनों की कमी को किनारे कर होनहार कशिश अब अमेरिका में पढ़ेगी

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इरादा पक्का हो और मन में सच्ची लगन हो तो बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह साबित किया है स्टडी हॉल स्कूल की 11वीं की छात्रा कशिश ने।
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16 वर्षीय कशिश अब अमेरिका के सेंट लूइस मिसौरी स्थित पार्कवे साउथ हाईस्कूल में 11वीं की पढ़ाई करेगी।
उसे यह अवसर यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के कैनेडी लुगर यूथ एक्सचेंज एंड स्टडी (यस) प्रोग्राम छात्रवृत्ति के अंतर्गत मिला है। सप्ताह के अंत में वह अमेरिका के लिए रवाना हो जाएगी।
कशिश ने बताया कि 2009 में प्रेरणा गर्ल्स स्कूल में उसका दाखिला कराया गया था। उत्कृष्ट अकादमिक प्रदर्शन की बदौलत उसे स्टडी हॉल में पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति मिली।
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अमेरिका में पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति योजना के लिए उसने काफी मेहनत की। प्रिंसिपल राखी पंजवानी ने बताया कि छात्रवृत्ति के लिए उसकी तैयारी कराई गई।
टेस्ट व साक्षात्कार में उसने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। छात्रवृत्ति देने वाली टीम ने उसके घर का दौरा किया।
उन्होंने बताया कि यह छात्रवृत्ति आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिलती है, जिनका अकादमिक प्रदर्शन उत्कृष्ट होना चाहिए। साथ ही मौखिक व लिखित अंग्रेजी भाषा में पारंगत होना चाहिए।
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बताया कि स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन से यस प्रोग्राम के लिए अभी तक 10 बालिकाओं को यूएस में पढ़ने के लिए चुना जा चुका है।
पांच साल की उम्र में खो दिया था पिता को
कशिश की मां शशि स्वयं सहायता समूह में काम करती हैं। शशि बताती हैं कि पांच साल की उम्र में ही कशिश के सिर से पिता का साया उठ गया था। अकेले तीन बेटियों की परवरिश पर लोगों ने बहुत सवाल खड़े किए। आज बेटी की उपलब्धि ने सबके सवालों का जवाब दे दिया है। प्रेरणा स्कूल और स्टडी हॉल स्कूल प्रशासन ने बेटी की शिक्षा-दीक्षा की जिम्मेदारी संभाली। इनकी वजह से ही दो और बेटियों को स्कूल भेज पाई। कशिश कहती हैं कि मां ने शिक्षा के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। स्कूल प्रशासन व शिक्षकों की बदौलत विदेश में पढ़ाई करने जा रही हूं।
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