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Lucknow News: कर्ण के दान ने जीता दिल

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गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में आनंद अनुभूति वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजि
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लखनऊ। महाकवि भास की संस्कृत नाट्यकृति कर्णभारम के हिंदी रूपांतरण दानवीर कर्ण की अमर कथा का मंचन अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के प्रेक्षागृह में किया गया। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और संस्कृति निदेशालय, उत्तर प्रदेश के सहयोग से आनंद अनुभूति वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित नाटक में कर्ण के त्याग, वचनबद्धता और दानशीलता को जीवंत किया गया।
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मंचन में परशुराम के श्राप, माता कुंती को दिए वचन और इंद्र को कवच-कुंडल दान करने के प्रसंगों को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। निहत्थे कर्ण पर अर्जुन के बाण चलाने और मृत्यु के अंतिम क्षणों में भी सोने का दांत दान करने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। नाटक का हिंदी रूपांतरण संतोष कुमार त्रिपाठी ने किया, जबकि परिकल्पना और निर्देशन सोनी सिंह का रहा। कहानी महाभारत युद्ध के 16वें दिन की है। कर्ण की भूमिका में आकाश शुक्ला और शल्य के किरदार में विजय कुमार जायसवाल ने प्रभावी अभिनय किया। वहीं, कृष्ण की भूमिका में मनोज तिवारी और अर्जुन व इंद्र के रूप में अंश रावत ने दर्शकों की सराहना बटोरी।

गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में आनंद अनुभूति वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजि

गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में आनंद अनुभूति वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजि

गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में आनंद अनुभूति वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजि

गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में आनंद अनुभूति वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजि

गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में आनंद अनुभूति वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजि

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