शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद
वक्फ के मुतवल्ली पद से हटाए जाने के बाद फर्जी हस्ताक्षर करके बैंक से 20 हजार रुपये निकालकर हड़पने के आरोपी शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने शुक्रवार को कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। एसीजेएम सुदेश कुमार में मौलाना की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
इसके बाद मौलाना की ओर से जिला न्यायाधीश के समक्ष अर्जी दी गई। जिला न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव ने 40-40 हजार रुपये की दो जमानतें और मुचलका दाखिल करने पर मौलाना को रिहा करने का आदेश दिया। एसीजेएम की कस्टडी में मौजूद मौलाना की ओर से जमानतनामे दाखिल करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
पत्रावली के अनुसार वक्फ सज्जादिया कदीम व जहीद के दरोगा मो. अस्करी अली ने कोर्ट में परिवाद दायर करके बताया था कि कल्बे जव्वाद को 6 जनवरी 2015 को वक्फ के मुतवल्ली पद से हटा दिया गया था। उसके बाद परिवादी को वक्फ का दरोगा/केयरटेकर बनाया गया था।
मुतवल्ली पद से हटाए जाने के बाद भी कल्बे जव्वाद ने 14 मार्च 2015 को कूटरचित दस्तावेज और हस्ताक्षर के आधार पर स्टेट बैंक से वक्फ के खाते से 20 हजार रुपये निकाल कर हड़प लिया। वक्फ बोर्ड को 13 मई 2015 को इसका पता चला। इस मामले में गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद कोर्ट ने कल्बे जव्वाद को 24 अप्रैल 2018 को धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का आरोपी मानते हुए तलब किया था। मामले की अगली सुनवाई 3 जनवरी को होगी।