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Lucknow News: संवेदना के बगैर जुवेनाइल जस्टिस लागू नहीं हो सकता

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कार्यशाला का शुभारंभ करते किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष व न्यायमूर्ति अजय भनोट तथा डीजीपी राजीव
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लखनऊ। उच्च न्यायालय किशोर न्याय समिति, इलाहाबाद के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन और यूनिसेफ की ओर से शनिवार को पुलिस मुख्यालय में कार्यशाला का आयोजन किया गया। किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष व न्यायमूर्ति अजय भनोट ने कहा कि संवेदना के बगैर जुवेनाइल जस्टिस लागू नहीं हो सकता है। पुराने समय में बच्चों को डराते हुए कहा जाता था कि सो जाइये नहीं तो पुलिस अंकल आ जाएंगे। बच्चे डर के सो भी जाते थे।
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अब जुवेनाइल जस्टिस एक्ट आने के बाद से पुलिस का रोल अधिक संवेदनशील हो गया है। यह महत्वपूर्ण है कि जब कोई बच्चा पुलिस के संपर्क में आता है तो अफसर का बात करने का तरीका कैसा है। अगर अफसर की आवाज कड़क है तो बच्चा सहम जाएगा और असल मामला दब जाएगा। इसलिए लहजा अच्छा होना चाहिए।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि बच्चों से जुड़े प्रत्येक प्रकरण में पुलिस की भूमिका पूरे तंत्र की धुरी है। किसी भी बच्चे की स्थिति का प्रारंभिक आकलन थाना स्तर पर ही होता है। यही आकलन आगे चलकर बच्चे के भविष्य को गहराई से प्रभावित करता है। ऐसे में आवश्यक है कि पुलिस बच्चे और उसके परिवार के सर्वोत्तम हित में निर्णय लें। गलत जजमेंट बच्चे के जीवन पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। इसीलिए अनुभव, प्रशिक्षण, संवेदनशीलता और विधिक ज्ञान का संतुलित उपयोग अनिवार्य है।
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यूनिसेफ यूपी के चीफ ऑफ फील्ड अफसर डाॅ. जकारी एडम ने कहा कि किशोर न्याय और पॉक्सो पर 10वां नेशनल राउंडटेबल बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और त्वरित सहायता को मजबूत करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। यूपी हाईकोर्ट जुवेनाइल जस्टिस कमेटी की ओर से सभी संबंधित ढांचों को मजबूत करने की भावना सराहनीय है।

बाल संरक्षण की जिम्मेदारी सभी विभागों की
महिला कल्याण विभाग की निदेशक संदीप कौर ने कहा कि बाल संरक्षण किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि सभी विभागों का काम है। इसके महत्व को समझना जरूरी है। महिला एवं बाल संरक्षण विभाग की एडीजी पद्मजा चौहान ने कहा कि कोई भी बच्चा सबसे पहले पुलिस के संपर्क में आता है, जिसे देखभाल एवं संरक्षण की जरूरत होती है। बच्चों के मामलों पर समुचित समझ के साथ निर्णय लेना जरूरी है। कार्यक्रम में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट्स के नोडल अधिकारी, जिलों से आए विशेष किशोर पुलिस इकाइयों के प्रभारी तथा बाल कल्याण पुलिस अधिकारी शामिल रहे।

स्कूलों में दिखाई जाएगी शॉर्ट फिल्म

बाल दिवस पर महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन और यूपी पुलिस की ओर से किशोरों में लैंगिक जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से एक शॉर्ट फिल्म ’बढ़ते बच्चे’ तैयार की गई है। इसमें बाल विवाह, पॉक्सो अपराध, कम उम्र में अनचाहे संबंधों और उनके दुष्परिणामों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रस्तुत किया गया है। शिक्षा विभाग और यूपी पुलिस की करीब 18 हजार महिला बीट आरक्षियों के माध्यम से इस फिल्म का प्रसारण सभी सरकारी और निजी माध्यमिक विद्यालयों में किया जाएगा। यह फिल्म ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट के सहयोग से बनी है। कार्यशाला में इसे बनाने में सहयोग करने वाले और इसमें प्रतिभाग करने वाले कलाकारों को पुरस्कृत किया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ करते किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष व न्यायमूर्ति अजय भनोट तथा डीजीपी राजीव

कार्यशाला का शुभारंभ करते किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष व न्यायमूर्ति अजय भनोट तथा डीजीपी राजीव

कार्यशाला का शुभारंभ करते किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष व न्यायमूर्ति अजय भनोट तथा डीजीपी राजीव

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