लखनऊ। समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच हो, यह हमारा ध्येय होना चाहिए। ईमानदारी हमारा मूलमंत्र होना चाहिए। कोई भी कानूनी केस हो उसको जीतने से ज्यादा महत्वपूर्ण है, न्याय मिलना। एक वकील को अपनी पूरी तैयारी के साथ ही न्यायालय में खड़ा होना चाहिए। जो वकील समय के साथ खुद को अपग्रेड नहीं कर सके, वह आउटडेटेड हो गए। ये बातें रविवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में जब मैं जिला कोर्ट में वकालत सीख रहा था तब दो भाइयों के बीच का प्राॅपर्टी विवाद का एक केस ओवर-कॉन्फिडेंस में हार गया था। उसके बाद से मैं एक नोटबुक अपने पास रखने लगा। उसमें सबकुछ नोट करता हूं ताकि रिव्यू कर सकूं। स्टेट में एडवोकेट जनरल (एजी) रहने के दौरान भी मैंने बहुत कुछ सीखा।
इससे पहले कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान कुलपति ने कहा जस्टिस सूर्यकांत ने साबित किया है कि कैसे किसान का बेटा देश में कानून के सबसे ऊंचे पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि मैं छात्रों से कहना चाहूंगा कि अर्थ प्रधान विद्या की जगह मूल्य आधारित विद्या को तरजीह देनी चाहिए।
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सुशासन की नींव है मजबूत न्यायिक व्यवस्था : मुख्यमंत्री योगी
दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि न्याय व्यवस्था जितनी मजबूत होगी, सुशासन के लक्ष्यों को हासिल करना उतना ही सरल होगा। आज यहां से सफल होकर निकलने वाले छात्र देश की न्यायिक प्रणाली को नई दिशा देंगे। उन्होंने कहा कि ''सत्यं वद्, धर्मं चर'' भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा का सार है, जो आज भी संविधान और न्यायपालिका के मूल में है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में ई-कोर्ट, ई-पुलिसिंग, ई-प्रॉसिक्यूशन और फॉरेंसिक लैब्स को एकीकृत करने की दिशा में कार्य चल रहा है। साथ ही, दस जिलों में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स का निर्माण और 380 से अधिक फास्ट ट्रैक व पॉक्सो कोर्ट की स्थापना की गई है। बेंच और बार के बीच बेहतरीन समन्वय से ही ''रूल ऑफ लॉ'' प्रभावी हो सकता है। बेंच विवेक का प्रतीक है और बार संवेदना का। जब विवेक और संवेदना साथ आते हैं जो न्याय का सच्चा स्वरूप मूर्त रूप लेता है। चुटीले अंदाज में उन्होंने कहा कि पहले हमारे डिस्ट्रिक्ट जजों (डीजे) के दफ्तर में एयर कंडीशन नहीं था। हमने इसकी व्यवस्था की ताकि जब माहौल गरमाए तो एसी के जरिये ठंडा किया जा सके।
सरकार साइबर लॉ और एआई आधारित प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया त्वरित और पारदर्शी बने। उन्होंने न्यायमूर्ति सूर्यकांत को देश के अगले मुख्य न्यायाधीश पद की अग्रिम बधाई दी और युवाओं से आह्वान किया कि ''सत्य, धर्म और निष्ठा'' के मार्ग पर चलकर न्यायपूर्ण भारत के निर्माण में योगदान दें।
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सफलता के लिए तीन मंत्र याद रखें : हाईकोर्ट चीफ जस्टिस
इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण कुमार भंसाली ने सफलता के तीन मंत्र बताए। पहला मौन रहने की आदत होनी चाहिए। यह दर्शाता है कि आपको ज्ञान की गहराइयों का ध्यान है। दूसरा तैयारी पूरी हो ताकि कोर्ट रूम में आप कितना बोलते हैं, यह मायने नहीं रखता आपने कितना रिसर्च करके बोला है यह महत्वपूर्ण है। तीसरा सौजन्य और अनुग्रह करिश्मा से ज्यादा जरूरी है। विधि में अनुग्रह कोई सजावट नहीं, बल्कि आवश्यकता है।
मेधावियों को दिए मेडल
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस अरुण कुमार भंसाली व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीए-एलएलबी ऑनर्स, एलएलएम वन इयर, पीजीडीसीएल, पीजीडीआईपीआर पाठ्यक्रमों के मेधावियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य सहित कुल 21 पदक दिए। इनमें पांच गोल्ड, पांच सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज मेडल रहे। छह स्पांसर मेडल से भी मेधावियों को सम्मानित किया गया। समारोह में कुल 309 विद्यार्थियों को उपाधि दी गई। इनमें पीएचडी के 24, एलएलबी के 176, एलएलएम के 51, पीजी डिप्लोमा के 58 विद्यार्थी शामिल रहे।
कार्यक्रम में ये रहे माैजूद
दीक्षांत समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत, विश्वविद्यालय के विजिटर और सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, प्रदेश सरकार में मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, विवि के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण, विवि के फैकल्टी मेंबर्स, विधायक राजेश्वर सिंह, उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं व उनके अभिभावकगण मौजूद रहे।
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह।
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह।
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह।
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह।
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह।
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह।