प्रयागराज कुंभ के दौरान 2013 में रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे की न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट विधानमंडल के दोनों सदनों के पटल पर रखी जाएंगी। इससे संबंधित प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति दे दी गई।
वहीं, रिपोर्ट में दिए गए सुझावों पर सरकार इस कुंभ में संजीदगी से अमल कर रही है। इस हादसे का तात्कालिक कारण ऐन वक्त पर ट्रेन का प्लेटफार्म बदलना और पहले से ही फुल हो चुकी ट्रेनों को प्रयागराज जंक्शन पर लाना था। स्टेशन पर भीड़ के मद्देनजर तैयारियां भी पर्याप्त नहीं थीं।
रेलवे स्टेशन पर यह हादसा 10 फरवरी 2013 को मौनी अमावस्या के दिन हुआ था। राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि 14 अगस्त 2014 को एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट दे दी थी, पर पिछली सपा सरकार ने इस पर कोई एक्शन टेकिंग रिपोर्ट (एटीआर) तैयार नहीं की। न ही इस रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा गया।
प्रवक्ता ने बताया कि एटीआर सदन में रखी जाएगी, इसलिए गोपनीयता का पालन करते हुए उस पर मीडिया को कोई भी जानकारी नहीं दी जा सकती। पर, न्यायिक समिति ने जो सुझाव दिए थे, उन पर इस बार के कुंभ मेला में अमल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐन मौके पर ट्रेन का प्लेटफॉर्म बदला गया, जिससे भगदड़ मच गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भीड़ नियत्रित करने का तरीका भी ठीक नहीं था। प्रयागराज में दारागंज और झूंसी स्टेशन से चलने वाली ट्रेनें वहीं फुल हो जाती हैं। इन ट्रेनों को इलाहाबाद जंक्शन पर लाने का कोई तुक नहीं बनता क्योंकि, वहां अधिक भीड़ होने से भगदड़ मचने की अधिक आशंका रहती है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि न्यायिक समिति ने जो भी सुझाव दिए थे, उनकी जानकारी मीडिया को दी जा रही है।
दुर्घटना की जांच न्यायमूर्ति (अवकाश प्राप्त) ओंकारेश्वर भट्ट की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने की थी। क्या न्यायिक समिति की रिपोर्ट में कुछ अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। इस पर सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि रिपोर्ट पटल पर रखे जाने से पहले इस बारे में मीडिया को कोई जानकारी नहीं दी जा सकती।