वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला एक बार फिर लखनऊ का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। गणतंत्र दिवस पर उन्हें देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों में शामिल अशोक चक्र से सम्मानित किया जाएगा। इस खबर ने शुभांशु के परिजनों और मोहल्ले त्रिवेणी नगर निवासियों समेत पूरे शहर को उत्साह से भर दिया है।
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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रचने वाले शुभांशु शुक्ला के इस सम्मान को उनके अद्वितीय साहस, वैज्ञानिक योगदान और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के प्रति असाधारण समर्पण की स्वाभाविक मान्यता माना जा रहा है। इसकी सूचना मिलते ही उनके आवास और मोहल्ले में बधाई देने वालों का तांता लग गया। उनके पिता शंभू दयाल शुक्ला और मां आशा शुक्ला दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं।
बेटे की वजह से पिता का नाम हुआ बड़ा
शंभु दयाल शुक्ला ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि यह क्षण पूरे परिवार के लिए अविस्मरणीय है। सब ईश्वर की कृपा है। यह ऐसी उपलिब्ध है जब एक बेटे की वजह से पिता का नाम बड़ा हुआ है। समूचे देश को शुभांशु पर गर्व है। बेटे ने जो मुकाम हासिल किया है, उस पर शब्द कम पड़ जाते हैं। मां आशा शुक्ला ने भावुक स्वर में कहा कि बेटे ने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने बेटे को मिले स्नेह और सम्मान के लिए सभी का आभार जताया। बहन शुचि मिश्रा ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भाई को अशोक चक्र मिलना केवल हमारे परिवार नहीं, बल्कि पूरे शहर और देश के लिए गर्व की बात है।
अंतरिक्ष में किया था माइक्रोग्रैविटी पर प्रयोग
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री और निजी अंतरिक्ष मिशन ‘एक्सियम-4’ के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने वाले पहले भारतीय हैं। जून में 18 दिन तक अंतरिक्ष में रहकर उन्होंने माइक्रोग्रैविटी से जुड़े महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग किए। वैज्ञानिकों का मानना है कि उनके शोध मानव शरीर पर अंतरिक्ष के प्रभाव को समझने और भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की तैयारी में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।