41 हजार कांस्टेबलों की भर्ती प्रक्रिया में अड़ंगा पड़ सकता है। आप भी तो इन परिणामों का इंतजार नहीं कर रहे हैं?
यूपी पुलिस में 41,610 सिपाहियों की भर्ती के लिए जारी चयन परिणाम विवादों में आ गया है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं पर पहले से ही अनियमितता के आरोप में याचिकाएं दाखिल हैं।
भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम अदालत के निर्णय में निहित होगा। हाईकोर्ट में अब इन सैकड़ों याचिकाओं के बंच पर एक साथ सुनवाई होगी। फिलहाल, कोर्ट ने प्रदेश सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड को अपना पक्ष रखने के लिए तीन सप्ताह की और मोहलत दी है।
आरक्षी भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम 16 जुलाई को घोषित किया गया। इससे पूर्व ही हाईकोर्ट में याचिकाओं की बाढ़ आ गई थी। मुख्य याचिकाकर्ता अरविंद चिकारा और पवन उपाध्याय ने क्रमश: प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं को चुनौती दी है। इनके अधिवक्ता विजय गौतम के अनुसार 16 जुलाई को घोषित हुए परिणाम में कुल 38 हजार 991 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए।
भर्ती बोर्ड द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 55,994 अभ्यर्थियों में से 6,254 को व्हाइटनर का प्रयोग करने के बाद अंतिम चयन परिणाम से बाहर कर दिया गया है। इसके बाद भी 2,312 पद शेष रह गए जिन पर चयन नहीं हो सका।
इन पदों को अगली भर्ती के लिए अग्रसारित कर दिया गया। अंतिम चयन परिणाम को इन याचिकाओं में संशोधन अर्जी देकर चुनौती दी गई। न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने संशोधन अर्जी स्वीकार कर ली है।
प्रदेश सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड को तीन सप्ताह का समय जवाब दाखिल करने के लिए दिया है। सभी याचिकाओं पर कोर्ट 24 सितंबर को सुनवाई करेगी।
उल्लेखनीय है कि आरक्षी भर्ती के लिए 22,24,687 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिसमें से चार लाख 30 हजार 879 प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित हुए।
प्रारंभिक परीक्षा में धांधली के आरोप में याचिका दाखिल हुई जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि चयन परिणाम याचिका के निर्णय के अधीन रहेगा। इसके बाद मुख्य परीक्षा को भी चुनौती दी गई। इसमें भी कोर्ट ने यही आदेश पारित किया है।