लखनऊ। कोरोना संकट में एक तरफ लोग कारोबार में घाटा झेल रहे हैं, नौकरी रहने या चले जाने का डर मन में लिए जी रहे हैं, वहीं बालगृह से शरणालय तक का सफर तय करने वाले पाश्चातवर्ती देखरेख संगठन, गुडंबा लखनऊ के 21 युवाओं के लिए एक अच्छी खबर आई है। उन्हें चेन्नई इंडस्ट्रियल एरिया में जॉब ऑफर हुई है। कर्फ्यू के कारण उनका जाना रुक गया है, पर आवागमन शुरू होते ही ये बच्चे चेन्नई रवाना हो जाएंगे।
अनाथ से आत्मनिर्भर होने तक का सफर
गुडंबा स्थित पाश्चातवर्ती देखरेख संगठन में रहने वाले इन सभी 21 युवाओं की उम्र 18 से 21 साल है। संगठन के अधीक्षक अनिल कुमार यादव की मानें तो ये सभी अनाथ हैं और विभिन्न जिलों के बालगृहों से सफर तय करते हुए 18 साल का होने पर यहां भेजे गए थे। बीते दिन कौशल विकास के तहत एक बैंक द्वारा चलाए जा रहे ट्रेनिंग सेंटर से इनके प्रशिक्षण और प्लेसमेंट की प्रक्रिया महिला एवं बाल कल्याण निदेशालय की ओर से पूरी करवाई गई। इन्हें 17 मई को वहां ज्वॉइन करना था, लेकिन कोरोना के चलते कंपनी और विभाग दोनों ने ज्वॉइनिंग की तारीख आगे बढ़ा दी है।
बदला व्यवहार : अब लड़ाई नहीं संगठन की टूटी चीजों को जोड़ उसे संवार रहे
अनिल कुमार कहते हैं कि कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिक के काम समेत कई तरह का प्रशिक्षण इन्हें दिया गया है। मन में डर भी था कि कहीं बाहर निकलने के बाद इनमें भाग जाने जैसे विचार न आ जाएं। हमारी कोशिश रंग लाई और इन्होंने रुचि लेकर काम सीखना शुरू किया। नतीजा ये हुआ कि कल तक आपस में लड़ने वाले ये युवा अब हंसते-खेलते अपने भविष्य के सपने बुन रहे हैं। संगठन कैंपस में रिपेयरिंग का काम हो या साज-सजावट का, ये खुद से करने लगे हैं।
प्लेसमेंट बनेगा मिसाल, आगे की राह खुली
डिप्टी सीपीओ सर्वेश पांडेय कहते हैं कि इन युवाओं को नौकरी मिलने से हमारा भी आत्मविश्वास बढ़ा है। ये चुनौती हमेशा से हमारे सामने रही है कि बच्चों का पुनर्वास करा सकें। इन 21 युवाओं का प्लेसमेंट एक मिसाल बनेगा। कोविड का संकट खत्म हो तो हम जल्द ही समारोह कर इन्हें विदा करें। हमारी एक जिम्मेदारी पूरी हुई।