- एक्ट में प्रावधान का हवाला देते हुए कुलपति ने उच्च शिक्षा मंत्री को भेजा प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय ने सरकार से राज्य के सभी अल्पसंख्यकों संस्थानों को संबद्धता का अधिकार देने की मांग की है। विश्वविद्यालय के कुलपति ने उच्च शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर उन्हें इस संबंध में प्रस्ताव सौंपा है। प्रस्ताव में अधिनियम का हवाला दिया गया है, जिसमें भाषा विश्वविद्यालय को सरकार द्वारा प्राधिकृत करने पर अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थाओं को संबद्धता में सहायता देने की बात कही गई है।
वर्ष 2013 में ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि की स्थापना के समय राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 7 ख में ये प्रावधान किया गया था कि राज्य सरकार के प्राधिकृत करने पर विश्वविद्यालय को प्रदेश के सभी शैक्षणिक अल्पसंख्यक संस्थाओं को संबद्धता देने का अधिकार प्राप्त हो जाएगा। उस समय यह माना जा रहा था कि अल्पसंख्यक संस्थानों की संबद्धता अब भाषा विवि के जिम्मे आ जाएगी। शैक्षणिक अल्पसंख्यक संस्थानों को संबद्धता प्रदान करने के प्रावधान का मकसद विश्वविद्यालय को आर्थिक स्तर पर सक्षम बनाना था। कुलसचिव भावना मिश्रा के मुताबिक विश्वविद्यालय को सरकार की ओर से जो वित्तीय अनुदान प्राप्त होता है उससे शिक्षकों का वेतन भी पूरा होने में समस्या होती है। ऐसे में अन्य खर्चे निकालने के लिए छात्रों के शुल्क का ही सहारा होता है। इसलिए कुलपति ने उच्च शिक्षा मंत्री के सामने प्रस्ताव रखा है।
दो किस्त में प्राप्त हो अनुदान
विश्वविद्यालय की ओर से मंत्री से अनुरोध किया गया कि उन्हें गैर वेतन मद से प्राप्त होने वाला अनुदान चार की बजाय दो किस्तों में भुगतान कर दिया जाए। जिससे विश्वविद्यालय को खर्च निकालने में आसानी हो सके। अभी विश्वविद्यालय को गैर वेतन मद में करीब 2 करोड़ रुपए का अनुदान मिलता है। जो विवि को चार किस्तों में भुगतान किया जाता है।
आदेश जारी होने पर इनकी मिल सकती है संबद्धता
सरकार की ओर अल्पसंख्यक कॉलेजों की भाषा विवि को देने अनुमति मिलने के बाद शहर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान लविवि की बजाय भाषा विवि से संबद्ध हो जाएंगे। क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज, शिया पीजी कॉलेज, आईटी कॉलेज, मुमताज कॉलेज, करामत हुसैन गर्ल्स डिग्री कॉलेज समेत अन्य।
भाषा विवि को अधिनियम में प्रावधान के हिसाब संबद्धता प्रदान करने का अधिकार मिले इसके लिए उच्च शिक्षा मंत्री अनुरोध किया गया है। इस संबंध में उन्हें एक प्रस्ताव भी सौंपा गया है। स्वीकृत होने पर विवि को राज्य स्तर पर अकादमिक पहचान मिलने के साथ ही वित्तीय मदद भी मिल पाएगी।
प्रो. एनबी सिंह कुलपति भाषा विवि