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बिना यात्रियों के दौड़ी जनता तो लग गया ब्रेक

Wed, 25 Mar 2015 11:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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तारीख 20 मार्च। करीब 1500 यात्रियों को लेकर दौड़ रही जनता एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई। कारण ब्रेक नहीं लगा। इसी जनता एक्सप्रेस की बोगियों की ब्रेक प्रणाली और बोगी के प्रेशर के लिए 24 मार्च को फिर दौड़ाया गया।
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मगर खाली। न बोगियों में कोई यात्री था न यात्रियों के वजन के बराबर बोगियों में कुछ रखा गया। जांच में जनता एक्सप्रेस के चारों ब्रेक इस्तेमाल हुए और बछरावां स्टेशन की मेन लाइन पर वह सही जगह पर जाकर रुकी।

खाली बोगियों को दौड़ाकर ही इंजन और बोगी के प्रेशर और ब्रेक प्रणाली की जांच कर ली गई। बहरहाल रेलवे के अफसर कह रहे हैं कि ट्रायल में गड़बड़ी पकड़ने में कामयाबी मिली है।
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यात्रियों का भार ही पीछे धकेलता है इंजन

यात्रियों को ले जाते हुए एक ट्रेन में औसतन 100 टन का भार तो महज यात्रियों का होता है। जानकारों के मुताबिक इस भार के कारण ही बोगियां इंजन को पीछे से धकेलती हैं।

ब्रेक लगाने के समय इंजन को पीछे से आने वाले दबाव को भी झेलना होता है।  बीती 17 और 18 अक्तूबर को लखनऊ से आनंद विहार टर्मिनल तक डबल डेकर ट्रेन के ट्रायल के लिए भी उसकी सीटों पर यात्रियों के भार के बराबर वजन वाली बालू भरी हुईं बोरियां रखी गयी थी। जिससे ट्रेन अपने वास्तविक भार, स्पीड और स्वरूप में दौड़ सके।

भरी हुई गतिशील बोगियों को रोकने के लिए उसी के समानुपात में बल का प्रयोग करना होता है। आसान शब्दों में कहें तो बोगियों को रोकने के लिए इंजन को बोगियों की तरफ उतना ही बल लगाना होता है। अगर बोगियां खाली हैं तो कम दबाव झेलना होगा। खाली बोगियों में आसानी से ब्रेक भी लग जाएगा।

ट्रायल 95 की जगह 60 की स्पीड में हुआ

ट्रायल में डब्ल्यूडीएम 3डी श्रेणी का डीजल इंजन लगाया गया था, यहीं श्रेणी का इंजन घटना के समय जनता एक्सप्र्रेस में लगा था। हालांकि सूत्रों का कहना है कि ट्रायल में दौड़ा इंजन उस घटना वाले इंजन से बेहतर दशा का इस्तेमाल हुआ।

जनता एक्सप्रेस 20 मार्च को जब बछरावां के 1400 मीटर पहले डिस्टेंस सिग्नल से अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हुई थी तो उसकी गति 95 किलोमीटर प्रतिघंटा थी। मंगलवार को जब खाली बोगियों का ट्रायल हुआ तो उस डिस्टेंस सिग्नल से गुजरते हुए ट्रेन की गति केवल 60 किलोमीटर प्रतिघंटा ही रही।

ऐसे में वास्तविक गति न होने पर हादसे के समय ड्राइवर के ब्रेक लगाने के प्रयासों की जांच किस तरह हुई होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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तड़तड़ाहट से गूंजी जनता की बोगियां

जनता एक्सप्रेस जब कनकहा से छूटी तो उसकी बोगियों में रास्ते पर जमकर पटरी पर पड़े पत्थरों की तड़तड़ाहट होती रही। ट्रेन को निगोहां में रोका गया तो पता चला कि इंजन में लगा एक पाइप टूटकर पटरी पर लटक गया था जिसकी वजह से गिटटी उड़कर बोगियों  से टकरा रही थी।

मंगलवार सुबह डिप्टी सीआरएस आरएम खोईवाल और रमन कुमार सिंह ने चारबाग में जनता एक्सप्रेस की बोगियों की जांच की। खाली बोगियों को पहले बछरावां से वाराणसी तक ले जाना था। लेकिन सीएंडडब्ल्यू ने जनता एक्सप्रेस की बोगियों को केवल बछरावां स्टेशन तक जाने और वापस आने के लिए ही फिटनेस सर्टिफिकेट दिया था।

जिसके चलते बछरावां से जनता एक्सप्रेस की खाली बोगियों को वाराणसी न भेजकर लखनऊ वापस कर दिया गया। जनता एक्सप्रेस के इंजन से सटी जनरल बोगी में रेलवे कर्मचारी थे, जबकि गार्ड की एसएलआर बोगी में डिप्टी सीआरएस और इंजन में मैकेनिकल ब्रांच के रेलवे अफसर थे।
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