भाजपा में बतौर पूर्णकालिक पदाधिकारी काम करने के लिए अमूमन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारकों को ही भेजा जाता है। वैसे तो जरूरत के लिहाज से अब कभी भी संघ के प्रचारक को सहयोगी संगठनों में बतौर संगठन मंत्री भेजा जाने लगा है। पर, सामान्यत: मार्च में होने वाली प्रतिनिधि सभा और जुलाई में होने वाली बैठक में ही प्रचारकों की नई भूमिका का फैसला किया जाता है।
सूत्र बताते हैं कि संघ से कुछ नए चेहरे भाजपा में भेजे जाएंगे जबकि इस समय क्षेत्र संगठन मंत्रियों में एक को संघ में वापस बुलाया जा सकता है या उन्हें अन्य किसी सहयोगी संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसी के साथ मौजूदा संगठन मंत्रियों के क्षेत्रों में भी बदलाव प्रस्तावित है।
भाजपा संगठन के पास मौजूद फीडबैक कई मंत्रियों की भूमिका व रीति-नीति को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा है। इसे देखते हुए पार्टी ने मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव का मन बना लिया है। साथ ही कुछ लोगों को संगठन में भेजने का फैसला ले लिया है।
वहीं, संगठन के कुछ चेहरे सरकार में भेजे जाएंगे। जाहिर है कि इनकी जगह नए लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और मौजूदा पदाधिकारियों में कुछ को तरक्की देकर महत्वपूर्ण भूमिका में लाया जा सकता है।
वैसे तो सदस्यता अभियान और संगठनात्मक चुनाव वर्ष होने के नाते संगठन का नया ढांचा बनना ही है। पर, मंत्रिमंडल में फेरबदल की स्थिति में संगठन के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका में बदलाव होना तय है। इस नाते नड्डा का यह दौरा उनके फीडबैक प्राप्त करने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।