सोनभद्र स्थित जीवाश्म पार्क को यूनेस्को सूची में दर्ज कराने के लिए आईयूसीएन निदेशक ने मंथन किया। दिल्ली में चल रही विश्व धरोहर समिति की बैठक में ईको टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों से वार्ता हुई।
सोनभद्र स्थित सलखन जीवाश्म पार्क को यूनेस्को की सूची में दर्ज कराने की कवायद तेज कर दी गई है। इसके तहत इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के डायरेक्टर टिम बैडमैन के साथ दिल्ली में ईको टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों ने विस्तार से मंथन किया है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। जिनको धरातल पर उतारने का काम ईको टूरिज्म बोर्ड करेगा।
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टिम बैडमैन इस समय दिल्ली में चल रही 46वीं विश्व धरोहर समिति की बैठक में शामिल होने भारत आए हैं। आईयूसीएन एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो प्रकृति संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रयोग के क्षेत्र में काम करता है।
ईको टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सोनभद्र स्थित सलखन जीवाश्म पार्क 160 करोड़ साल पुराना है। साथ ही अब तक यहां किए गए सर्वे आदि के बारे में जानकारी दी। साथ ही इसकी संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
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पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा है कि जीवाश्म पार्क को यूनेस्को की सूची में दर्ज कराने के लिए उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म बोर्ड की दिल्ली में आईयूसीएन के विशेषज्ञों के साथ बैठक सकारात्मक रही। बैठक में टिम बैडमैन, वीबी माथुर सेवानिवृत्त आईएफएस और पूर्व निदेशक डब्ल्यूआईआई, द्रोण से डॉ. शिखा, बीएसआईपी में भूविज्ञानी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शिल्पा पांडेय, पर्यटन विभाग के आकाश प्रियदर्शी उपस्थित थे।
उन्होंने बताया कि वन विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और डोजियर तैयार करने में विशेषज्ञता रखने वाली संस्था द्रोण ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार पार्क के भूवैज्ञानिक महत्व और इसकी विरासत की जांच कर ली है।
सलखन जीवाश्म पार्क प्राकृतिक विरासत श्रेणी में आता है और भूविज्ञान के विशेषज्ञ इस पार्क को विश्व विरासत सूची में शामिल करने में काफी रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा कि इस पार्क को देखने के लिए बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं।
आईयूसीएन विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र में प्रकृति संरक्षण और इन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है। समिति विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए संभावित स्थलों पर विचार-विमर्श करेगी।
साथ ही खतरे में पड़े विश्व धरोहर स्थलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक संरक्षण और प्रबंधन कार्यों पर निर्णय लेगी। आईयूसीएन प्राकृतिक विविधता और विशेषज्ञता को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी उपायों पर वैश्विक प्रयास करती है।