प्रदेश में नए लोकायुक्त की नियुक्ति फिलहाल जल्द होने के आसार नहीं नजर आ रहे हैं। मनमाफिक लोकायुक्त की नियुक्ति का रास्ता साफ करने के लिए राज्य सरकार ने भले ही उप्र लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम 1975 में संशोधन करके चयन प्रक्रिया में चीफ जस्टिस की भूमिका समाप्त कर दी हो लेकिन यह मामला सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट में पहुंच जाने की वजह से इसमें विलंब हो सकता है।
बहरहाल अब गेंद राजभवन के पाले में है और कोर्ट का आदेश आने तक विधेयक को लंबित रखा जा सकता है। इस बीच राज्य सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति में विशेषाधिकार का तर्क देते हुए कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी में भी जुटी है। नए लोकायुक्त के चयन के लिए फरवरी में हुई बैठक से लेकर विधानमंडल से विधेयक पारित कराने तक का पूरा ब्यौरा तैयार कराया जा रहा है जिसे कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा।
प्रदेश में नए लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर सरकार और राजभवन के बीच छिड़ा विवाद खत्म होता नहीं दिख रहा। जस्टिस रविंद्र सिंह के नाम पर ऐतराज के बाद सरकार ने कानून में बदलाव करके हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लोकायुक्त की चयन प्रक्रिया से ही बाहर कर दिया। सरकार के इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट इस मामले पर दायर जनहित याचिका पर 7 सितंबर को सुनवाई करेगा। उधर, सुप्रीम कोर्ट में भी यह मामला विचाराधीन है।