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सुना है क्या: साहब का होटल है, दूर रहो, साथ ही 'नए ठौर की तलाश में माननीय और फूंक-फूंककर रख रहे कदम' के किस्से

Thu, 16 Jul 2026 03:18 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'साहब का होटल है, दूर रहो' की कहानी। इसके अलावा 'नए ठौर की तलाश में माननीय' और 'फूंक-फूंक कर रख रहे कदम' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

साहब का होटल है, दूर रहो

राजधानी में एक ब्यूरोक्रेट का होटल नियमों से परे है। साहब का खौफ इतना है कि अवैध निर्माण के बावजूद अफसर आसपास गुजरने से भी डरते हैं। भले ही उन्होंने अपने होटल का आधा साजो-सामान सड़क पर सजा रखा है लेकिन उससे दूर रहने में ही अफसर भलाई मान रहे हैं। यह बात दीगर है कि आसपास के कई आशियाने कार्रवाई की जद में आते रहे हैं लेकिन साहब की पावर के आगे सारे सरकारी कायदे-कानून हांफने लगते हैं।

नए ठौर की तलाश में माननीय

पिछले चुनाव में सीट हार चुके एक माननीय अब नए ठौर की तलाश में हैं। 2027 में वह पश्चिमी यूपी के अंतिम जिले की एक ऐसी सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए हैं, जिससे जीतने वाली माननीय इस समय सरकार में नायब के तौर पर हैं। फिर भी हारने वाले माननीय की नजर उनकी सीट पर गड़ी है, क्योंकि उन्हें इस सीट से भगवा की जीत पक्की दिख रही है। इसके लिए माननीय अपनी निष्ठा भी बदलने को तैयार हैं। इसलिए उन्होंने लखनऊ के बजाय दिल्ली के तार को भी मजबूत करने के लिए पर्दे के पीछे से रास्ता ढूंढ लिया है।

फूंक-फूंककर रख रहे कदम

चढ़ावा चोरी का मामला चर्चा में है। मामले में नाम ऐसे लोगों के हैं, जिनकी पहुंच देश की व्यवस्था के शीर्ष तक है। इसलिए जांच करने वाले अफसर फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। फीडबैक भी लोगों से अधिकारी ले रहे हैं कि सबकुछ ठीक चल रहा है या नहीं। पुलिसिया कार्रवाई कहीं ऐसी दिशा में तो नहीं कि आगे चलकर साहब लोगों को ही भारी पड़ जाए। इसलिए पूरी एहतियात बरत रहे हैं।

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