लखनऊ। बड़ा इमामबाड़ा स्थित आसिफी मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह की याद में मजलिस हुई। इसमें नसरुल्लाह को ईसाले सवाब पेश किया गया। शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि मजलूम किसी भी धर्म या फिरके का हो, उसकी मदद करना मुसलमानों पर फर्ज है। इस्लाम में जुल्म करना सबसे बड़ा जुर्म है। मौलाना ने कहा कि शहीद कभी मरता नहीं है।