लखनऊ। द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया की ओर से ऑप्टिमाइजेशन ऑफ पावर प्लांट अ केस स्टडी विषय पर हुए सेमिनार में मुख्य अतिथि इंजीनियर वीबी सिंह ने कहा कि देश में ऊर्जा की बढ़ती मांग के बीच पावरप्लांट्स की क्षमता बढ़ानी जरूरी है। उन्होंने नई तकनीक अपनाने की भी अपील की।
रिवर बैंक कॉलोनी स्थित इंजीनियर्स भवन में हुए सेमिनार में मुख्य वक्ता और एक निजी पावरप्लांट संभालने वाले इंजीनियर एमएम खान ने बताया कि भारतीय कोयले में राख की मात्रा ज्यादा और कैलोरिफिक वैल्यू कम होती है। घरेलू कोयले की ऊष्मीय क्षमता लगभग 3,000 से 4,000 किलो कैलोरी प्रति किलोग्राम होती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका से आयातित कोयले की गुणवत्ता लगभग 6,000 किलो कैलोरी प्रति किलोग्राम या उससे अधिक होती है। इसी कारण विदेशी पावर प्लांट्स की कार्यक्षमता भारतीय पावर प्लांट्स की तुलना में अधिक देखी जाती है।
विश्व स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले कोयले के उपयोग, बेहतर बॉयलर डिजाइन, सुपरक्रिटिकल तकनीक, कम हीट रेट और आधुनिक नियंत्रण प्रणाली के कारण विकसित देशों के पावर प्लांट्स ऊर्जा उत्पादन में अधिक सक्षम हैं। भारत में भी एनटीपीसी व निजी क्षेत्र अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल तकनीक अपनाकर आगे बढ़ रहे हैं। मुंबई से आए सैयद अहसन महदी तकवी ने कहा कि तकनीकों एवं बेहतर ईंधन प्रबंधन के माध्यम से विद्युत उत्पादन को अधिक सुरक्षित, किफायती एवं प्रभावी बनाया जा सकता है। इस दौरान संयोजक इं. आरके श्रीवास्तव, मानद सचिव इं. एनके निषाद आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मौजूद लोग।
कार्यक्रम में मौजूद लोग।