फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

2016 में चंद्रमा, 2018 में मंगल पर होगा भारत

Mon, 10 Nov 2014 11:18 AM IST
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रथम प्रयास में मंगल की कक्षा में यान को स्थापित करने का रिकॉर्ड बनाने वाले भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का अगला कदम चंद्रमा और मंगल ग्रह पर होगा। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) अपने अंतरिक्ष अभियान में जहां 2016 में चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। वहीं, 2018 में मंगल ग्रह की सतह पर रोवर उतारने की योजना इसरो के वैज्ञानिक बना रहे हैं।
विज्ञापन


दुनिया में भारत की अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में ताकत दिखाने का यह महत्वपूर्ण मौका होगा। रविवार को बायोटेक पार्क में प्रो. आरएस चतुर्वेदी नेशनल कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन पहुंचे इसरो के मार्स कलर कैमरा व चंद्रयान-2 अभियान के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. एएस आर्या ने यह जानकारी अमर उजाला को दी।

डॉ. आर्या का कहना था कि अंतरिक्ष अभियान में इसरो आने वाले सालों में महत्वपूर्ण कार्य करेगा। इसी कदम के रूप में 2016-17 में इसरो चंद्रमा पर अपना लैंडर उतार देगा। लैंडर से से निकला रोवर चंद्रमा की सतह से जानकारी जुटाएगा। यह जानकारी काफी महत्वपूर्ण होगी।
विज्ञापन

चंद्रयान-2 के लिए अभी से प्रक्रिया शुरू

चंद्रयान-2 अभियान में इसके लिए प्रक्रिया अभी से शुरू कर दी गई है। इसके अलावा मंगल की कक्षा में यान स्थापित होने के बाद अब ग्रह की सतह पर लैंडर उतारने की योजना इसरो बना रहा है।

योजना है कि 2018 में मंगल ग्रह की सतह पर रोवर उतरे। इस योजना को अभी अमल में लाया जाना है। अभी यह प्रस्तावित है। यह दोनों ही कदम भारत के अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़े कीर्तिमान होंगे।

वहीं, मंगल अभियान के बारे में उन्होंने बताया कि अभी आंकड़े मिलना शुरू हुए हैं। आंकड़ों का आंकलन करने में छह महीने तक का समय लगता है।

2015 में पास मंगल ग्रह से जुड़ी सूचनाएं आना शुरू हो जाएगीं। अभी केवल तस्वीरों का आंकलन कर वहां के वातावरण के बारे में जानकारी मिल पा रही है। आंकलन रिपोर्ट मिलने के बाद मंगल ग्रह के वायुमंडल और सतह पर आए बदलाव को पता किया जा सकेगा।
विज्ञापन

हैरान कर देने वाली जानकारियां मिलेंगी

मंगल अभियान के बारे में डॉ. आर्या ने बताया कि केवल 15 किग्रा. वजन के उपकरण पूरा काम कर रहे हैं। इसमें पांच उपकरण प्रमुख हैं। पहला, एलएपी कैमरा वायुमंडल में आ रही कमी की दर को जांचेगा। दूसरा, मीथेन सेंसर कैमरा मीथेन गैस की मौजूदगी पता कर रहा है।

तीसरा, मेनका उपकरण वायुमंडल की स्टडी कर रहा है। चौथा उपकरण तापमान के आंकड़े जुटा रहा है। पांचवा, टीआईएस कैमरा वहां की सतह और वायुमंडल की थर्मल इमेज ले रहा है।

पता चलेगी पृथ्वी पर जिंदगी की उम्र
डॉ. आर्या के मुताबिक मंगल गृह पर जिंदगी के तत्व क्यों नहीं बचे? वहां के वायुमंडल में आ रही गिरावट की दर क्या है? इससे हम अपनी पृथ्वी की जिंदगी या वायुमंडल में आ रही गिरावट का आंकलन कर सकेंगे। इससे पता चलेगा कि हमारी पृथ्वी पर वायुमंडल की जिंदगी कितनी बची है। यह काम भारत सबसे कम पैसे खर्च कर करेगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें