रेलवे में बड़े पैमाने पर विस्फोट की साजिश रचने वाले तीन बदमाशों ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि कानपुर के पुखरायां रेल हादसे के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ था।
तीनों बदमाशों को बिहार पुलिस ने मंगलवार को पश्चिम चंपारण जिले से गिरफ्तार किया। पुलिस का दावा है कि तीनों आरोपियों मोती पासवान, उमा शंकर पटेल और मुकेश यादव को नेपाली नागरिक ब्रजेश गिरि के लिए काम करते थे।
इन्हें यूपी में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए तेयार किया गया था। इनसे पूछताछ के लिए यूपी एटीएस व कानपुर पुलिस की टीम बिहार भेजी गई है।
दुबई में बैठा है आका
मोतिहारी में गिफ्तार तीन अपराधियों ने बताया कि उन्हें तोड़फोड़ के काम को अंजाम देने के लिए नेपाली शख्स ब्रजेश गिरी ने तीन लाख रुपये दिए थे। ब्रजेश दुबई में बैठे शम्सुल होदा के संपर्क था। शम्सुल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़ा था।
मोतिहारी में गिरफ्तार तीनों बदमाशों को पिछले साल एक अक्टूबर को पश्चिम चंपारण जिले के घोड़ासहन के रेलवे ट्रैक पर बम रखने के लिए पैसे दिए गए थे। लेकिन ग्रामीणों की मदद से यह बम खोज निकाला गया और निष्क्रिय कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि इन तीनों की गिरफ्तारी हालांकि पूर्वी चंपारण जिला में हुई है, अन्य नेपाल के तिलैया में गिरफ्तार किए गए थे। राणा ने बताया कि दो अपराधी गजेंद्र शर्मा और राकेश यादव की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है, जो पूर्व चंपारण जिला में छुपे हुए हैं।
मोती पासवान और उसके दो अन्य सहयोगियों पेशेवर अपराधी हैं और इनकी एक दर्जन से अधिक आपराधिक मामलों में संलिप्तता रही है। गौरतलब है कि नेपाल से सटे बिहार के पूर्वी चंपारण जिला के रक्सौल से ही अगस्त 2013 में इंडियन मुजाहिद्दीन के प्रमुख यासिन भटकल को गिरफ्तार किया गया था।
पुखरायां हादसे में152 लोगों की गई थी जान
कानपुर। इंदौर से पटना जा रही इंदौर-पटना एक्सप्रेस 20 नवंबर की तड़के करीब तीन बजे पुखरायां स्टेशन के पास पलट गई थी।
हादसे में 152 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। ट्रेन के 14 डिब्बे पलट गए थे। कई कोच एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए थे।