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इरफान खान बोले, आंखें तो सबकी बोलती हैं बस पढ़ने वाला चाहिए...

Thu, 30 Apr 2020 06:37 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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तिम्मांशू धूलिया और दोस्तों के साथ इरफान पठान। - फोटो : amar ujala
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आंखों से संवाद बोलते अदाकार इरफान खान यूं तो लखनऊ में किसी फिल्म की शूटिंग से नहीं जुड़ सके, लेकिन जब उन्हें नेशनल अवॉर्ड की घोषणा हुई तो वे उसका जश्न मनाने परिवार के साथ सबको सरप्राइज देते हुए 2013 की गर्मियों में लखनऊ आ पहुंचे थे। जहां उनके निर्देशक दोस्त तिग्मांशु धूलिया एक फिल्म की शूटिंग में बिजी थे। एक शॉट को ओके कहकर वह पलटे ही थे कि इरफान उनके साथ थे।

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नगर में होने वाली कई फिल्मों की शूटिंग से जुड़े रहने वाले लाइन प्रोड्यूसर सुधांशु सावंत ने बताया अप्रैल 2013 में लखनऊ में सैफ अली खान की फिल्म बुलेट राजा की शूटिंग चल रही थी। माल एवेन्यू की एक कोठी (अब चर्चित होटल) में मूवी की शूटिंग जारी थी। अचानक दोपहर के समय इरफान अपनी फैमिली के साथ वहां आए और डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया के साथ फिल्म पान सिंह तोमर और खुद को मिले नेशनल अवॉर्ड का जश्न मनाया।

यह सफलता दोनों के लिए इसलिए भी खास थी क्योंकि कभी तिग्मांशु ने इरफान से वादा कर रखा था कि एक ना एक दिन उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिलवा कर मानेंगे। तब फिल्म में शूटिंग के साथ जुड़े लखनऊ के कलाकार और लाइन प्रोड्यूसर सैफ ने बताया इरफान, उनकी पत्नी और उनका एक बेटा तीनों लोग दो दिनों तक लखनऊ में रहे।
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उनकी आंखों में एक गजब का कॉन्फिडेंस था...
तिग्मांशु के साथ जश्न मनाया गया, फिल्म की शूटिंग पर भी कुछ चर्चा हुई और दूसरे दिन वे वापस मुंबई चले गए। पान सिंह तोमर की सफलता के बाद वे अचानक हमारे सेट पर पूरे परिवार के साथ आ पहुचे.. और फिर सबने मिल कर केक काट कर पानसिंह तोमर की सफलता की खुशी मनाई। उनकी आंखों में एक गजब का कॉन्फिडेंस था... मैंने उनसे जब कहा भाई आपकी आंखें बोलती हैं तो हंस पड़े... बोले सबकी आंखें बोलती हैं बस पढ़ने वाला चाहिए।

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लखनऊ में शूटिंग को लेकर हमेशा थे उत्सुक

इरफान के साथ विनोद मिश्रा। - फोटो : amar ujala
कलाकार एसोसिएशन के सचिव रंगकर्मी विनोद मिश्रा ने बताया मुंबई आने-जाने के दौरान उनसे कई बार मुलाकात हुई। लखनऊ में शूटिंग को लेकर जब भी चर्चा होती वह हमेशा साथी कलाकार दधि पांडे, रवि गौतम के साथ काफी उत्सुकता दिखाते।

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के सचिव तरुण राज ने बताया 80 के दशक में जब मैंने नाटक की दुनिया का रुख किया तो दिल्ली में इरफान से मुलाकातें हुई। थिएटर की बारीक बातें तब भी वे हम लोगों से शेयर किया करते। जब मंडी हाउस में हम लोग चाय की दुकान पर चुस्कियां लिया करते थे।

इरफान के साथ फिल्म हासिल में काम कर चुके लेखक अभिनेता ज्ञानेश कमल ने बताया कि इस फिल्म से इरफान बॉलीवुड में जा रहे थे, तिग्मांशू निर्देशक बन रहे थे और मेरी शुरुआत हो रही थी। इरफान में अभिनय के दौरान जो ऊर्जा थी उसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। उनकी देखा देखी सारा ग्रुप जोश से लबरेज होकर काम करता रहता।
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