स्टील-सीमेंट खरीद में घोटाले के आरोपी व निलंबित जेडी (निर्माण) गोपाल शंकर को नियम-कानून ताक पर रखकर प्रमोशन दिया गया था। साजिश के तहत उनसे कई सीनियर अधिकारियों की चरित्र पंजिका (एसीआर) पूरी नहीं की गई।
साथ ही कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही दिखाकर उन्हें डीपीसी से बाहर कर दिया गया। इस मामले में गोपाल शंकर को पदावनत करने के लिए शासन ने मंडी परिषद को दिशा-निर्देश दे दिए हैं, ताकि गोपाल शंकर के कोर्ट में जाने पर भी परिषद का पक्ष मजबूत रहे। मंडी परिषद के एक अधिकारी ने बताया कि जल्द ही पदावनति आदेश जारी कर दिया जाएगा।
शासन से शिकायत की गई थी कि मंडी परिषद में आगरा और बुंदेलखंड में निर्धारित दरों (एसओआर) से ज्यादा पर सीमेंट और स्टील खरीदी गई। गोपाल शंकर को कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पदोन्नति देने के आरोप भी लगाए गए थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की जांच तत्कालीन एपीसी प्रभात कुमार को सौंपी थी। 30 अप्रैल को रिटायर होने से पहले प्रभात कुमार ने अपनी रिपोर्ट दे दी। इसमें कहा गया है कि संयुक्त निदेशक (निर्माण) गोपाल शंकर को अनियमित ढंग से प्रोन्नति दी गई। उन्होंने जेडी को पदोन्नति के तहत दिए गए लाभों की नियमानुसार वसूली की संस्तुति भी की।
रिपोर्ट के अनुसार, गोपाल शंकर के झांसी के कार्यकाल में तय दरों से अधिक पर स्टील खरीदने से सरकारी खजाने को 5.47 करोड़ और सीमेंट खरीद में 32.47 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इन आरोपों में गोपाल शंकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए अनुशासनिक कार्यवाही की संस्तुति भी की गई थी।
स्टील खरीद में गड़बड़ियों के लिए मुख्य अभियंता एसएन मिश्रा से भी वसूली और उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही के लिए कहा गया है। रिपोर्ट में की गई संस्तुतियों के आधार पर गोपाल शंकर को सस्पेंड कर दिया गया। उन्हें पदावनत करने के लिए शासन से दिशा-निर्देश मांगे गए थे।
तीन अन्य अधिकारी वर्तमान पद पर बने रहेंगे
वर्ष 2016 में हुई डीपीसी के आधार पर गोपाल शंकर को उप निदेशक से संयुक्त निदेशक (जेडी) के पद पर पदोन्नति दी गई थी। मंडी परिषद ने शासन से पूछा था कि क्या उस डीपीसी के तहत तीन अन्य अधिकारियों को मिले प्रमोशन पर भी विचार किया जाए।
शासन से मिले दिशा-निर्देशों के अनुसार, गड़बड़ सिर्फ गोपाल शंकर को दिए गए प्रमोशन में ही है। इसके लिए न सिर्फ कई अधिकारियों की वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया, बल्कि जान-बूझकर उनकी एसीआर को भी लटकाए रखा गया। इसलिए डीपीसी के अन्य निर्णय यथावत रखते हुए सिर्फ गोपाल शंकर को ही पदावनत किया जाएगा।