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Lucknow News: चार अस्पतालों की फार्मेसी में मिली गड़बड़ी, तीन को नोटिस जारी, एक की बिक्री पर रोक

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जावि​त्री अस्पताल में दवाओं की जांच करतीं ड्रग इंस्पेक्टर।
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लखनऊ। मरीजों को बेहतर इलाज और दवाएं उपलब्ध कराने का दावा करने वाले राजधानी के बड़े अस्पतालों में दवा कारोबार की व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की 29 सितंबर से 2 अक्तूबर तक चली जांच में लखनऊ के चार अस्पतालों टेंडर पाम हॉस्पिटल, टीएस मेडिकल कॉलेज, क्लाउड नाइन हॉस्पिटल और जावित्री हॉस्पिटल में दवाओं की खरीद, बिक्री और भंडारण में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
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एफएसडीए के सहायक मंडल आयुक्त ब्रजेश सिंह के मुताबिक, टेंडर पाम हॉस्पिटल और टीएस मेडिकल कॉलेज में फार्मेसी लाइसेंस, बिक्री बिलों में दर्ज पते, स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड में खामियां मिलीं। टीएस मेडिकल कॉलेज और क्लाउड नाइन हॉस्पिटल में दवाओं की कोल्ड-चेन और तापमान लॉगर से जुड़े मानक भी पूरे नहीं मिले।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ निर्माता कंपनियां दवाओं पर ऊंची एमआरपी अंकित कर रही हैं, जबकि अस्पताल उन्हें काफी कम कीमत पर खरीद रहे हैं। इसके बावजूद मरीजों से लगभग पूरी एमआरपी वसूले जाने की बात सामने आई है। एफएसडीए ने अस्पतालों, सप्लायर्स और निर्माता कंपनियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
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जावित्री की थोक फर्म पर बिक्री रोक
जावित्री हॉस्पिटल में संचालित थोक फर्म में दवाओं का भंडारण मानकों के अनुरूप नहीं मिला। एफएसडीए ने औषधि अधिनियम के तहत तत्काल दवा बिक्री पर रोक लगा दी। अब इस फर्म से अस्पताल की फार्मेसी के जरिये मरीजों को दवाएं नहीं दी जा सकेंगी।

इन अस्पतालों की फार्मेसी पर पहले ही हुई कार्रवाई
अपोलोमेडिक्स : ओपीडी फार्मेसी में स्टॉक लेजर, आईपीडी फाइल और शेड्यूल एच1 दवाओं का अनिवार्य रजिस्टर नहीं मिला। रिकॉर्ड में बैच नंबर भी दर्ज नहीं थे। ओपीडी फार्मेसी बंद करने के निर्देश दिए गए।
ग्लोब हॉस्पिटल : दवाओं की खरीद-बिक्री के अभिलेख नहीं मिले। दवाएं दो स्थानों पर रखी थीं, जिनमें से एक स्थान सील किया गया।
रीजेंसी अस्पताल : भौतिक स्टॉक और रिकॉर्ड में अंतर तथा दवाओं के बैच नंबर में विसंगति मिली।
- डॉ. केएनएस मेमोरियल, शेखर हॉस्पिटल, तलवार स्किन इंस्टीट्यूट, मिड्लैन्ड और अवध हॉस्पिटल में स्टॉक व अभिलेखों में अंतर, फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति, बिलिंग और भंडारण संबंधी खामियां मिलीं।
- सहायक आयुक्त ने बताया कि मेदांता और चरक अस्पताल में महंगी दवाओं के विकल्प की उपलब्धता भी जांची गई है। विभाग का फोकस दवा की आपूर्ति से लेकर मरीज को बिक्री तक पूरी प्रक्रिया की पड़ताल पर है।
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