मजदूरों को अब दस रुपये में सस्ता व पौष्टिक भोजन नहीं मिलेगा। सोमवार को आईआरसीटीसी ने 750 मजदूरों को अंतिम बार भोजन परोसने के बाद योजना से हाथ खींच लिए हैं।
राज्य सरकार ने आईआरसीटीसी से योजना चलाने का आग्रह किया, लेकिन आईआरसीटीसी अधिकारियों ने नई कैटरिंग पॉलिसी का हवाला देते हुए मना कर दिया।
मालूम हो कि पिछले वर्ष राज्य सरकार ने भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के साथ मिलकर पंजीकृत मजदूरों के लिए सस्ता व बेहतर भोजन उपलब्ध कराने की योजना शुरू की थी।
इसके तहत आईआरसीटीसी ने देवा रोड स्थित अमृत फूड से खाना तैयार करवाकर कंस्ट्रक्शन साइटों पर पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले साल 10 मई को लोकभवन में काम कर रहे मजदूरों को भोजन भी परोसने के साथ योजना का उद्घाटन किया था।
आईआरसीटीसी अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल 17 अप्रैल को राज्य सरकार के साथ किया गया समझौता खत्म हो गया था। इसके बाद सरकार ने योजना तीन महीने और बढ़ाने का आग्रह किया था, जो 17 जुलाई को खत्म हो गया।
सोमवार को वृंदावन, न्यू पुलिस भवन, एचसीएल, कैंसर अस्पताल, डीएलएफ में काम कर रहे 750 मजदूरों को अंतिम बार खाना परोसा गया। इन मजदूरों के लिए मंगलवार से खाने का संकट पैदा हो जाएगा।
अधिकारियों ने आगे बताया कि रेलवे की नई कैटरिंग पॉलिसी आ गई है, जिसके तहत आईआरसीटीसी सिर्फ ट्रेनों व स्टेशनों पर ही खाना परोसेगी।
ऐसे सभी नॉन रेलवे एवेन्यू में काम बंद कर दिया जाएगा। इसी क्रम में लखनऊ में योजना को अलविदा कहा गया है। आईआरसीटीसी ने 15 महीने तक मजूदरों को खाना परोसा। प्रतिमाह 4500 मजदूरों को अलग-अलग साइटों पर भोजन परोसा जाता था।