इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) ने प्रधानमंत्री से केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा रोके गए महंगाई भत्ते की किस्त को बहाल कर उसका भुगतान कराने की गुहार लगाई है। कहा है कि निरंतर बढ़ रही महंगाई से कर्मचारियों के लिए परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। ऊपर से कई राज्यों में वेतन में भी कटौती की गई है और कई में बोनस का भी भुगतान नहीं किया गया है। इससे कर्मचारियों को आर्थिक रूप से बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इप्सेफ के अध्यक्ष वीपी मिश्र एवं महामंत्री प्रेमचंद ने मंगलवार को प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा है किकोविड-19 के इलाज में लगे नर्सेज फार्मेसिस्ट, लैब टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्निीशियन सहित अन्य पैरामेडिकल स्टाफ , वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी एवं अन्य विभागों के कर्मचारियों में कई की जान भी चली गई। अब भी अलग-अलग विभागों के कई कर्मचारी संक्त्रस्मित हैं। पर, न तो इन कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए सरकार आगे आई और न आर्थिक सहायता दी है।
पत्र में इस बात पर भी क्षोभ व दुख व्यक्त किया गया कि कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन देकर सरकार का सहयोग भी किया। कोरोना संकट में कोई आंदोलन भी नहीं किया। सरकार को भी कर्मचारियों से सहयोगात्मक रुख रखते हुए अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। पर, ऐसा नहीं किया गया। इप्सेफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शशि कुमार मिश्र ने कहा कि प्रदेश सरकार तो भर्तियां एवं पदोन्नतियां कर रही है लेकिन केंद्र सरकार के ज्यादातर विभागों में तमाम पद रिक्त पड़े हैं। मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों में कर्मचारियों को बोनस का भुगतान भी नहीं किया गया है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में संगठन के राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्र, कर्मचारी नेता के.के. सचान और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत शामिल हैं।