मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने चौक डिवीजन में बिजली बिल कम करने की जांच पूरी कर दी है। प्रबंध निदेशक ने पावर कॉर्पोरेशन निदेशक (वाणिज्य) को जांच रिपोर्ट भेज दी जो शक्ति भवन पहुंच गई है। इस रिपोर्ट की क्रॉस जांच चल रही है।
सूत्रों का कहना कि बिजली बिल कम करने में तय मानकों पर अमल नहीं किया गया। मगर अब तक कार्रवाई नहीं की गई है।
अमर उजाला ने 11 जनवरी को ‘लाखों का बिजली बिल घटा कर बना दिया हजारों में’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर अधिकारियों, कर्मियों एवं दलालों की साठगांठ का खुलासा किया था।
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के निर्देश पर प्रबंध निदेशक सूर्यपाल गंगवार ने तीन सदस्यीय कमेटी से जांच कराई थी। टीम की जांच शुरू होने के बाद शासन ने रिपोर्ट तलब कर ली।
मुख्य अभियंता मधुकर वर्मा एवं अधीक्षण अभियंता विनय भूषण को नए सिरे से जांच सौंपी गई। इस कमेटी ने भी जांच शुरू कर दी, पर बाद में इस कमेटी को भंग कर दिया गया।
शासन ने भी तलब की रिपोर्ट
पावर कॉर्पोरेशन के सूत्रों ने बताया कि शासन ने बिजली बिल का कम करने की जांच रिपोर्ट तलब करने के लिए शक्ति भवन को पत्र भेजा था। मध्यांचल निगम ने जो जांच रिपोर्ट शक्ति भवन भेजी है, उसको क्रॉस चेक करने के बाद शासन को भेजा जाएगा।
जांच में फंसा टीम का इंजीनियर
रेजिडेंसी डिवीजन के तहत कैसरबाग निवासी उपभोक्ता केशव रॉय का मैकेनिकल मीटर बदलने के नाम जो चेकिंग इंजीनियर दो लाख रुपये की घूस मांग रहा था, वह जांच में फंस गया है। जांच टीम ने उपभोक्ता से बयान करने के बाद इंजीनियर को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। टीम को शुक्रवार इस प्रकरण की जांच पूरी करके अधीक्षण अभियंता मनीष कुमार अग्रवाल को सौंपनी है। जानकारी में यह भी आया कि उपभोक्ता के द्वारा इस प्रकरण में पुलिस को तहरीर दी जा सकती है।