एलडीए की जांच कमेटी ने रिपोर्ट में भले ही किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा आग लगाने की संभावना से इंकार किया है, लेकिन, अब भी इसकी आशंका खत्म नहीं हुई है। इसकी दो वजह हैं। एक, आग लगने के समय केवल एजेंसी के दो कर्मचारी ही मौके पर स्कैनिंग का काम कर रहे थे। दूसरा, घटना वाली रात 10:58 बजे सीसीटीवी कैमरा बंद हो गए। रिकॉर्ड रूम के अंदर कोई भी कैमरा काम नहीं कर रहा था।
एलडीए की जांच कमेटी ने खुद भी इसे स्वीकार किया है। रिकॉर्ड रूम के अंदर के सभी सीसीटीवी कैमरे रात 10:58 बजे बंद हो गए। इसी अवधि तक इनकी रिकॉर्डिंग मौजूद है। हालांकि, जांच कमेटी के सदस्यों का दावा है कि केवल एक कैमरा लिफ्ट के पास चलता रहा। इस कैमरे से ही देखा गया कि क्या कोई बाहर का व्यक्ति उधर आया। इसके अलावा एजेंसी के उन दोनों कर्मचारियों के बयान को ही शॉर्ट सर्किट से आग लगने का आधार माना गया है, जिनकी खुद की भूमिका संदिग्ध बनी है।
एलडीए के ही एक अधिकारी ने बताया कि रात के समय मेनलाइन के स्विच बंद कर दिए गए। सीसीटीवी कैमरे भी इसी लाइन से जुडे़ हैं। ऐसे में सीसीटीवी कैमरों की बिजली आपूर्ति बंद हो गई। यह जानकारी एलडीए के अधिकांश स्टाफ को है। कई बार इस सिस्टम पर सवाल भी उठे, क्योंकि इससे 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी प्रभावित होती है। इसके बाद भी सीसीटीवी कैमरों की बिजली आपूर्ति अलग नहीं की गई। कैमरों के लिए कोई पावर बैकअप भी नहीं है।
- फोटो : amar ujala
एलडीए के रिकॉर्ड रूम में लगी आग में 153 फाइलें जलकर खाक हो गईं। इन फाइलों को संपत्ति विभाग की बताया जा रहा है। एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह का दावा है कि इन फाइलों के रिकॉर्ड विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के सर्वर पर सुरक्षित हैं। ऐसे में किसी भी आवंटी का नुकसान नहीं होगा। वहीं आग लगने के पीछे शॉर्ट सर्किट की संभावना जताई गई है।
हालांकि, इसके साक्ष्य जांच टीम को नहीं मिले। सोमवार को जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट भी वीसी को सौंप दी। इसमें एलडीए के कार्यालयों में आग से बचाव के उपाय सुधारने की जरूरत बताई गई है।
14 अक्तूबर 2017 की रात प्राधिकरण भवन की पुरानी बिल्डिंग में लगी आग की जांच के लिए तहसीलदार राजेश शुक्ला और एक्सईएन इलेक्ट्रिकल वीके शर्मा की समिति वीसी ने बना दी। समिति ने जांच करने के बाद सोमवार को अपनी रिपोर्ट वीसी को सौंपी।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 153 फाइलें आग में जलीं। ये फाइलें पांच बॉक्स में रखी हुई थीं। सभी फाइलें संपत्ति विभाग की हैं, जिनका ऑनलाइन रिकार्ड एलडीए के पास मौजूद हैं। इस रिकॉर्ड में आवंटियों के आवंटन, जमा धनराशि, निबंधन की जानकारी शामिल है।
जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सभी बिंदुओं पर पड़ताल की गई, लेकिन आग लगने का कारण नहीं पता चल सका। एक सीसीटीवी कैमरा उस समय चल रहा था। उसकी फुटेज भी चेक की गई। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की संभावना ही लग रही है, लेकिन इसका भी साक्ष्य नहीं मिला। शॉर्ट सर्किट की संभावना सिर्फ इसलिए जताई गई है क्योंकि वहां एक सर्किट बोर्ड लगा हुआ है।
एलडीए का दावा, घोटाले से जुड़ी फाइलें सुरक्षित
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एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह का कहना है कि जो फाइलें जल गई हैं, उनमें अधिकांश को स्कैन कर लिया गया था। इसके अलावा जो हार्ड डिस्क जल गई थी, उसका डाटा भी रिकवर हो गया है। ऐसे में जरूरत होने पर इन फाइलों की डुप्लीकेट कॉपी डिजिटल डाटा से बनाई जा सकेगी। एलडीए वीसी ने घोटाले से जुड़ी किसी भी फाइल के आग में जलने से मना किया है। उनका कहना है कि ऐसी सभी फाइलें एलडीए में सुरक्षित हैं।
अब फाइलों की सुरक्षा की आई याद
रिकॉर्ड रूम में आग लगने के बाद अब एलडीए अफसरों को अब फाइलों की सुरक्षा की याद आई है। रात के समय केवल एजेंसी के स्टाफ के भरोसे छोड़ दिए गए रिकॉर्ड रूम में अब एलडीए कर्मचारी भी रहेंगे। लालबाग कार्यालय और गोमतीनगर मुख्यालय दोनों जगह रात में स्कैनिंग का काम कराने के लिए तीन-तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगेगी। इनकी देखरेख में ही रिकॉर्ड की स्कैनिंग होगी। इन कर्मचारियों को आग बुझाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वीसी ने एजेंसी को भी अपना काम री-शिड्यूल कर इसे जल्द खत्म करने को कहा है।
अब फायर सेफ्टी भी प्राथमिकता पर आई
एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह ने बताया कि प्राधिकरण के सामान और रिकॉर्ड की सुरक्षा के लिए फायर सेफ्टी को सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्य अभियंता इलेक्ट्रिकल डीपी सिंह खुद 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देंगे। उनसे पूरे परिसर की फायर सेफ्टी और सीसीटीवी से निगरानी पर सर्वे कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। 23 अक्तूबर को फायर सेफ्टी के टेंडर खुल जाएंगे। इसके बाद एजेंसी को तुरंत अपना काम शुरू करने के आदेश दिए जाएंगे।