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सरकारी 'दामाद' के साथ बेपर्दा होंगे ये सफेदपोश!

Sun, 30 Nov 2014 12:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर यादव सिंह पर अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) शिकंजा कसने जा रहा है। यादव के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर ली है।
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ईडी के प्रवक्ता के अनुसार आयकर विभाग से यादव सिंह पर कार्रवाई के दौरान मिले दस्तावेजों के संबंध में पूरी जानकारी मांगी है। इसी के आधार पर यह कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि दो दिन तक चले छापे में आयकर विभाग ने यादव के खिलाफ टैक्स चोरी और काली कमाई के दस्तावेज जब्त किए हैं।

इनमें 11 करोड़ नकद के अलावा दो किलो हीरे, सोने व महंगे रत्नों के जेवरात भी शामिल हैं। छापे में यादव की पत्नी कुसुम लता की 40 बोगस कंपनियों का खुलासा हुआ है।
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आयकर विभाग सोमवार से नोएडा अथॉरिटी में ‘यादव सिंह सिंडीकेट’ के खिलाफ मिशन शुरू करेगा। इस मिशन में करीब 300 बेशकीमती प्लॉट और कई अफसरों की जन्मपत्री खंगाली जाएगी।

इस कार्रवाई से 40 कंपनियों सहित 300 प्लॉट की खरीद करने वाले रियल एस्टेट कारोबारियों में हड़कंप मचा है।

पता लगाएंगे, प्लॉट के लिए रकम आई कहां से

आयकर महानिदेशक (जांच) कृष्णा सैनी ने बताया कि नोएडा अथॉरिटी सोमवार को यादव सिंह की पत्नी कुसुम लता के डायरेक्टर नेतृत्व वाली 40 कंपनियों को आवंटित किए गए प्लॉट और इस खेल में अहम भूमिका निभाने वाले अफसरों का काला चिट्ठा विभाग के छापामार दल को देगा।

अफसरों के हाथ में दस्तावेजी सुबूत लगते ही सबसे पहले नोएडा अथॉरिटी द्वारा आवंटित प्लॉट की खरीद कीमत का आंकलन करेंगे।

फिर इंजीनियर यादव सिंह, डायरेक्टर राजेंद्र मनोचा, नम्रता मनोचा, अनिल पेशावरी, कुसुम लता के दिल्ली नोएडा, गाजियाबाद के 20 ठिकानों से जब्त कंपनियों के दस्तावेज से प्लॉट की सेल कीमत का आंकलन कर कैपिटल गेन पर आयकर चोरी की गणना होगी।

आयकर विभाग नोएडा अथॉरिटी के उन अफसरों एवं रसूखदारों से पूछताछ करेगा जिन्होंने कीमती प्लॉट आवंटित करने की आड़ में मोटा कमीशन लिया है।

40 कंपनी समेत अरबों रुपये के प्लॉट खरीदने वालों से यह भी पूछताछ होगी कि खरीदने के लिए रकम कहां से आई।

जांच सही हुई तो फंसेंगे कई रसूखदार

छापे में 40 कंपनियों में सिर्फ चार डायरेक्टर का खुलासा हुआ है। इनमें कुसुम लता, राजेंद्र मनोचा, नम्रता मनोचा, अनिल पेशावरी हैं। आयकर विभाग के सूत्र बताते कि यादव की पत्नी कुसुम लता कुछ कंपनियों से डायरेक्टर का पद छोड़ चुकी हैं।

अथॉरिटी ने एक कागजी कंपनी को सात से आठ प्लॉट आवंटित किया है। यादव की सांठगांठ के चलते प्लॉट आवंटन के नियमों को भी ताक पर रखा गया है।

नोएडा अथॉरिटी के आवंटित प्लॉट की जांच अगर सही तरीके से हुई तो उसकी आंच कई रसूखदार तक पहुंचेगी। इनमें बड़े अफसरों से लेकर दिल्ली समेत पश्चिमी यूपी के बड़े रियल एस्टेट कारोबारी भी हो सकते हैं।

रियल एस्टेट के जिन कारोबारियों ने कुसुमलता की पत्नी की कागजी कंपनियों से कंपनी सहित प्लॉट को खरीदा, उनके तार अफसरों एवं राजनेताओं से जुड़े हैं।

सपा राज में भी चल निकला यादव सिंह का सिक्का

यादव सिंह वह नाम है जो अपने हिसाब से समीकरण बनाता रहा है। बसपा सरकार रही हो या फिर सपा की, उसने अपने हिसाब से अपनी तैनाती कराई।

बसपा सरकार में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सभी महत्वपूर्ण कामों पर एकाधिकार रखने वाले यादव सिंह पर सपा सरकार की नजर भले ही टेढ़ी हुई हो लेकिन ज्यादा दिन नहीं रह सकी।

सपा के एक शीर्ष नेता के इशारे पर यादव सिंह को 17 महीने में ही बहाल कर दिया गया। यही नहीं पहले नोएडा फिर ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे जैसे तीन महत्वपूर्ण अथॉरिटी का मुख्य अभियंता बना दिया गया। एनसीआर क्षेत्र की ये तीनों सबसे प्राइम पोस्टिंग मानी जाती हैं।

यादव सिंह ने औद्योगिक विकास प्राधिकरण में वर्ष 1981 में बतौर अवर अभियंता ज्वाइन किया। औद्योगिक विकास प्राधिकरण में आने के बाद से ही वह अपने हिसाब से पोस्टिंग पाते रहे।

यादव सिंह ने वर्ष 2011 में औद्योगिक विकास प्राधिकरण से एक नया पद सृजित कराया और इसे नाम दिया गया इंजीनियर इन चीफ।

इसके अधीन नोएडा अथॉरिटी और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी दोनों कर दिया गया। इसके बाद नोएडा अथॉरिटी और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से जितने भी काम दिए गए सभी यादव सिंह के इशारे पर।

जांच के बाद कुछ सफेदपोश चेहरों से हटेंगे नकाब

यादव सिंह और उनके सहयोगियों पर आयकर विभाग का शिकंजा कसता जा रहा है। 36 घंटों की छापेमारी और पूछताछ के बाद करोड़ों रुपये के काले धन और मनी लांड्रिंग की बात सामने आने लगी है।

हालांकि विभागीय अधिकारी जांच पूरी होने के इंतजार में है। इसके बाद ही कुछ सफेदपोश चेहरों से नकाब हटाया जा सकता है। फिलहाल विभागीय टीम दस्तावेज जुटाने के लिए गुपचुप तरीके से प्राधिकरण पहुंच रही है।

आयकर विभाग की छापेमारी के बाद यादव सिंह और उनके सहयोगियों के पास करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति मिली थी। जिसे जब्त किया जा चुका है। यह संपत्ति कहां से आई इसको लेकर विभागीय अधिकारी जांच पड़ताल करने में जुटे हैं।

शुक्रवार देर रात व शनिवार को हुई पूछताछ में यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता के पार्टनर अनिल पेशारिया व राजेंद्र मनोचा ने करीब 60 करोड़ रुपये की ब्लैक मनी की बात स्वीकार की है।

इसके अलावा कई बेनामी संपत्ति की बात भी बताई जा रही है। उधर, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह यादव सिंह के घर के बाहर खड़ी कार अश्वनी नाम के किसी शख्स की बताई जा रही है।

कॉल डिटेल से ली जा रही जानकारी

महीने में तीन से चार बार नंबर बदलने वाले यादव सिंह के सभी नंबरों की कॉल डिटेल निकाली जा रही है। सूत्रों के मुताबिक तीनों प्राधिकरण का प्रभार मिलने के बाद एक माह के अंदर करीब 60 फोन प्राधिकरण के बड़े ठेकेदारों को किए गए। जिसमें यादव सिंह व उनके सहयोगियों के करीबी हैं।

आयकर विभाग की टीम ने प्राधिकरण से गत एक महीने में जारी किए गए टेंडरों की डिटेल मांगी है। हालांकि प्राधिकरण ने सभी टेंडर रद्द कर दिए हैं लेकिन इन टेंडरों की जांच के बाद यादव सिंह के चहेते ठेकेदारों तक भी पहुंचा जा सकता है। ऐसे में टेंडरों व दस्तावेज जांच के दायरे में है।

छह माह से आईटी के निशाने पर थे यादव सिंह
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के  प्रमुख अभियंता रहे यादव सिंह पर शिकंजा कसने में आयकर विभाग को खासी मशक्कत करनी पड़ी।

छह महीने से यादव आईटी के निशाने पर थे, लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। ‘ऑपरेशन ब्लैक मनी’ को अंजाम तक पहुंचाने के लिए खुद अफसरों को यादव के ठिकानों की रेकी करनी पड़ी।

आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में यादव सिंह लंबे समय से संदेह के दायरे में थे, लेकिन उन पर कार्रवाई करने से पहले विभाग को ठोस सबूतों की जरूरत थी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, यादव सिंह के कुल 22 ठिकानों पर छापे मारे गए जिनमें अकेले नोएडा के 18 ठिकाने शामिल हैं।

चाय वाला था यादव सिंह का खास मुहरा

यादव सिंह के हाथों लिखी एक छोटी सी पर्ची से करोड़ों रुपये का फैसला होता था। जिसके पास यह पर्ची पहुंचती थी वही इसकी कूट भाषा पढ़ सकता था।

सूत्र बताते हैं कि बसपा शासन में यादव सिंह ने एक चाय वाला रखा हुआ था जो काफी करीबी था। सुरक्षा के लिहाज से पिस्टल का लाइसेंस भी दिलवा दिया गया था। वह इधर-उधर से गोपनीय कागजात और लिफाफे लाने का काम करता था।

चाय वाला होने से कोई उस पर शक भी नहीं करता था। प्राधिकरण में उस समय तैनात रहे एक पुलिस निरीक्षक भी यादव सिंह के काफी नजदीकी थे, कुछ खास लेन-देन की बात के लिए उनसे ही लोगों को बात करनी होती थी। टेंडर समेत अन्य छोटे-मोटे कामकाज पुलिस निरीक्षक के ही मार्फत होते थे।
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दिल्ली से लखनऊ के रास्ते पहुंचे थे यादव

बसपा सरकार जाते ही यादव सिंह निहत्थे हो गए थे। ऊपर से घोटाले की जांच और रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कुछ समय के लिए भूमिगत भी हुए थे।

लेकिन सपा सरकार आने के बाद उनके कुछ खास गुर्गे सरकार में पैठ बनाने में जुट गए। पहले सीबीसीआईडी जांच पूरी कराने की शर्त रखी गई।

जैसे ही क्लीनचिट मिली यादव सिंह फिर मजबूत हो गए। सूत्र बताते हैं कि दोबारा से बहाली और अच्छा ओहदा पाने के लिए पहले दिल्ली में सपा के एक कद्दावर नेता से मुलाकात कराई गई।

इसके बाद एक महिला ने लखनऊ में बात करनी शुरू की। जैसे ही लखनऊ से हरी झंडी मिली उनकी बहाली हो गई और कुछ दिन बाद ही वे तीनों प्राधिकरण के इंजीनिरिंग विभाग के मुखिया बन गए।

सच्चाई यह है कि नोएडा में जमीन का आवंटन पूरा हो चुका है। ग्रेनो में प्रक्रिया चल तो रही है लेकिन वहां पर जमीन अधिग्रहण को लेकर ढेर सारे विवाद हैं और किसान जमीन देने को राजी नहीं हैं।

वहीं, यमुना प्राधिकरण का दायरा ग्रेनो से लेकर आगरा तक फैला हुआ है। प्राधिकरण किसानों से सीधे जमीन खरीद रहा है। वहां पर ग्रेनो से लेकर आगरा तक आवंटन करने की ढेर सारी उम्मीदें हैं, इसी के चलते यादव सिंह ने नोएडा से लेकर आगरा तक साम्राज्य फैलाने का प्रयास किया था।
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