उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में एक्सरे टेक्नीशियन भर्ती में हुए भ्रष्टाचार में विभाग के सामने भी कई तरह की चुनौतियां हैं। तत्कालीन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और टेक्नीशियन द्वारा लिए गए वेतन की रिकवरी करने में कई तरह की मुश्किलें आएंगी। दूसरी तरफ अंकुर और अंकित नाम से फर्जीवाड़ा करके नौकरी करने वालों की भी जांच शुरू हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग में अर्पित के नाम से फर्जी दस्तावेज के जरिए नौकरी कर रहे छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। एक-एक एक्सरे टेक्नीशियन ने अब तक करीब साढ़े पांच करोड़ रुपया वेतन के रूप में लिया है। अब ये सभी फर्जी टेक्नीशियन फरार हो गए हैं।
आधार नंबर भी फर्जी होने की आशंका है। ऐसे में फर्जीवाड़ा करने वालों से वेतन रिकवरी करने में भी कई तरह की अड़चनें आने की आशंका है। दूसरी तरफ स्वास्थ्य महानिदेशालय ने सभी जिलों के मुख्य चिकत्सिाधिकारियों को यह भी आदेश दिया है कि वर्ष 2016 में चयनित 403 एक्सरे टेक्नीशियन की नए सिरे से सत्यापन कराया जाए।
अंकुर और अंकित मामले में मांगी रिपोर्ट
वर्ष 2016 की एक्सरे टेक्नीशियन की भर्ती में चयनित 403 में अंकुर के नाम से एक ही व्यक्ति है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में इस नाम से अभी तक दो लोगों के नौकरी करने की बात सामने आई है। इसमें एक मैनपुरी में तो दूसरा मुजफ्फरनगर में कार्यरत है। इसी तरह अंकित के नाम से पांच लोग कार्यरत हैं।
ये हरदोई, लखीमपुर और गोंडा में कार्यरत कर्मी वेतन ले रहे हैं, जबकि बदायूं, आजमगढ़, ललितपुर वाले नौकरी छोड़ चुके हैं। स्वास्थ्य महानिदेशालय की जांच टीम इनकी भी कुंडली खंगालने में लगी है। संबंधित जिलों के सीएमओ से रिपोर्ट मांगी गई है। सोमवार को लखीमपुर खीरी और गोंडा में कार्यरत एक्सरे टेक्नीशियन दोपहर बाद गायब बता रहे हैं। विभाग की ओर से मंगलवार को इनके बारे में कार्रवाई होने की उम्मीद है।
सपा अध्यक्ष ने भी किया सवाल उठाया
एक्सरे टेक्नीशियन भर्ती प्रकरण भले ही वर्ष 2016 का है, लेकिन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट किया और सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि नाम एक, नियुक्तियां अनेक, नियुक्तियों का काम भी जुगाड़ आयोग करने लगा है क्या? सपा अध्यक्ष को पोस्ट के बाद सोशल मीडिया में आरोप- प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।