लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के छात्रवृत्ति सेल की लापरवाही का खामियाजा छात्रों को दो साल बाद भी भुगतना पड़ा है। इस खुलासे के बाद बीबीएयू ने जांच कमेटी बनाई, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी कमेटी अपनी रिपोर्ट नहीं दे सकी है। उधर, छात्रवृत्ति सेल में पटल जरूर बदल गया है। छात्रवृत्ति सेल में फीस का डाटा फीडिंग का काम राहुल वार्ष्णेय देख रहे थे, लेकिन जांच पूरी भी नहीं हो पाई और इनके पटल में बदलाव कर दिया। इनकी जगह पर अब ये जिम्मेदारी डिप्टी रजिस्ट्रार आशीष रस्तोगी को दी गई है।
बीबीएयू में बीटेक सिविल इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष के 15 छात्रों ने 2022 में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था। इसके बाद विवि की छात्रवृत्ति सेल ने समाज कल्याण विभाग के पोर्टल पर पाठ्यक्रम की वास्तविक फीस के बीच एक बड़ा अंतर कर दिया। जो फीस 1,15,300 थी, उसे 15,300 बताया गया। इसी तरह से 2023 में एमबीए प्रथम व द्वितीय वर्ष में कोर्स के हिसाब से 94,200 रुपये फीस निर्धारित थी, जिसे 92,600 बताया गया। इसी डाटा के अनुसार के समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति का भुगतान कर दिया। ऐसे में वास्तविक फीस की शेष राशि छात्रों को अपनी जेब से भरनी पड़ी थी। जांच में जब छात्रवृत्ति सेल की लापरवाही सामने आई तो विश्वविद्यालय ने फीस वापस किए जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया था और परेशान छात्रों को होना पड़ा।
इस मसले पर जांच कमेटी बनाई जा चुकी है , जांच चल रही है।
- डॉ. रचना गंगवार, प्रवक्ता बीबीएयू