लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की प्रथम कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने बुधवार को कार्यभार संभाल लिया। परिसर में पहुंचने के तुरंत बाद उन्होंने पहले कुलसचिव तुहीन द्विवेदी से विवि की नियमावली, प्रस्तावित योजनाओं व शिक्षण कार्य की प्रगति आदि के बारे में जानकारी ली। साथ ही शिक्षक-शिक्षिकाओं व विद्यार्थियों से मुलाकात की।
अमर उजाला से बातचीत में प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि भातखंडे, डीम्ड यूनिवर्सिटी से राज्य विश्वविद्यालय बना है और इसकी अपनी जरूरतें हैं। सबसे पहले नैक की कसौटी पर खरा उतरना है और फिर प्रयोग-शोध और रोजगार के लिए स्टार्टअप आइडिया पर काम करना है। मालूम हो कि अभी तक वीसी पद की जिम्मेदारी मंडलायुक्त रोशन जैकब के पास थी।
नैक के सभी मानकों पर खरा उतरने की तैयारी
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ में दो कार्यकाल पूरा कर चुकीं प्रो. मांडवी ने कहा कि फिलहाल मैं ये समझने की कोशिश कर रही हूं कि कहां विकास की जरूरत है। नृत्य-संगीत की शिक्षा के लिए इस विश्वविद्यालय का दुनिया भर में नाम है। इसकेप्रति लोगों की श्रद्धा है, हमें कसौटी पर खरा उतना है। ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को जोड़ना होगा। नैक के सातों मानक, चाहे संरचना हो, या पाठ्यक्रम हो या फिर शोध की बात हो, उसमें काम करना होगा। क्योंकि नैक की ग्रेडिंग पाना समय की मांग है।
तुलनात्मक अध्ययन से राह होगी आसान
प्रो. मांडवी ने कहा कि मैं खैरागढ़ यूनिवर्सिटी में रहकर आई हूं। वहां के अनुभव काम आएंगे। साथ ही अन्य विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को समझेंगे और तुलनात्मक अध्ययन पर काम करेंगे। राज्य विवि बनने के बाद भातखंडे ज्यादा अहम हो गया है।
साधना और रोजगार दोनों पर रहेगा जोर
प्रो. मांडवी ने कहा कि नृत्य-संगीत एक साधना है। शिक्षक हों या छात्र-छात्राएं, उनकी पहचान ही इसी साधना से होती है। इसके साथ ही हमें दोगुना मेहनत करनी होगी और इसमें कॅरिअर के ढेरों विकल्प तैयार कर विद्यार्थियों के लिए संगीत के स्टार्टअप खड़े करने है। हम कुछ एमओयू के प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। जैसे गर्भवती स्त्रियों के लिए म्यूजिकल चिकित्सा पद्धति फायदेमंद है। हम इस तरह के आइडिया पर काम करेंगे।