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बेहतर काम कर रही योगी सरकार, कानून-व्यवस्था में हुआ सुधार : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

Thu, 09 Jan 2020 11:19 AM IST
ishwar ashish अनिल श्रीवास्तव, अमर उजाला, लखनऊ
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
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पहली नौकरी के रूप में महिलाओं के विकास व शिक्षा के काम से जुड़ीं और फिर शिक्षिका रहीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अब प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी सुधार का काम हाथ में लिया है। वह प्रयास कर रही हैं कि सरकार के साथ-साथ स्वैच्छिक संगठनों, निजी व सार्वजनिक क्षेत्र के सहयोग से सरकारी प्राथमिक विद्यालयों व आंगनबाड़ी केंद्रों की दशा व दिशा ठीक की जाए। यहां सुविधाएं बढ़ें। प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत अभियान को प्रदेश में सफल बनाने के लिए भी वह जुटी हैं।

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राज्यपाल आनंदीबेन 15 फरवरी के बाद प्रदेश के उन आठ पिछड़े जिलों के दौरे पर निकलने वाली हैं जिन्हें केंद्र सरकार ने आकांक्षात्मक जिलों की सूची में शामिल किया है। इन जिलों के दौरे में वह जनसहभागिता से आयोजित कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगी।

उन्होंने बतौर कुलाधिपति प्रदेश के विश्वविद्यालयों को भी पांच-पांच गांव गोद लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों की निगरानी करने को कहा है। सीएए के खिलाफ हिंसात्मक प्रदर्शन की आलोचना करते हुए वह कहती हैं कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने ढाई साल में अच्छा काम किया है। जहां तक कानून-व्यवस्था का सवाल है तो पहले की तुलना में इसमें सुधार आया है। ‘अमर उजाला’ ने आनंदीबेन से विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश :
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महिला समूहों के जरिये गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार देने की मुहिम
राज्यपाल का कहना है कि वह महिला समूहों के जरिये गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार उपलब्ध कराने का अभियान चलाने जा रही है। इसकी शुरुआत लखनऊ पुलिस लाइन की महिलाओं के माध्यम से करने की योजना है। पुलिस लाइन में 15 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम के सिलसिले में मिलने आई महिलाओं से उन्होंने कहा है कि 200 महिलाएं एकत्र होकर एक दिन अलग-अलग पोषक आहार बनाएं। फिर उतनी ही संख्या में गर्भवती महिलाओं को एकत्र करके उन्हें सामने बैठाकर खिलाएं और उनसे बातचीत करें। पुलिस लाइन में होने वाले कार्यक्रम में वह महिलाओं से इस अभियान पर चर्चा करेंगी।

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सांविधानिक मुखिया के रूप में यूपी में पांच महीने

सवाल - राज्यपाल के रूप में यूपी में पांच माह से ज्यादा समय हो गया है। सांविधानिक मुखिया के रूप में कैसा अनुभव रहा?
जवाब-
अभी तक अनुभव अच्छा ही है। 32 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में शामिल हो चुकी हूं। विश्वविद्यालयों में जाने के बाद महसूस हुआ कि विश्वविद्यालयों को समाज और समाज को विश्वविद्यालयों से जुड़ना चाहिए। इसलिए मैंने हर विश्वविद्यालय को पांच-पांच गांव गोद लेकर वहां के लोगों की शिक्षा व स्वास्थ्य की चिंता करने को कहा है।

विश्वविद्यालय देखेंगे कि गांव के सभी बच्चों का स्कूलों में दाखिला हो जाए। तीन साल के सभी बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजे जाएं। गांवों में होने वाले प्रसव शत-प्रतिशत अस्पतालों में हों। आठवीं पास बच्चों के नौवीं में दाखिले हों और दसवीं व बारहवीं में अच्छे अंकों से पास होने वाले बच्चों को प्रोत्साहित किया जाए। मेरा ध्यान ऐसी योजनाओं पर है जो समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों का फायदा करने वाली हैं।

इन योजनाओं पर है ज्यादा फोकस

सवाल - किन योजनाओं पर ज्यादा फोकस है?
जवाब-
स्वच्छता के प्रति लोग जागरूक हों। टीबी मुक्त भारत के तहत मैंने उत्तर प्रदेश में मुहिम शुरू की है। जिलों के अफसरों, एनजीओ, व्यापारी संगठनों व अन्य सामाजिक संगठनों से आग्रह किया है कि 20 साल से कम उम्र के टीबी से ग्रस्त बच्चों को चिह्नित कर उन्हें गोद लिया जाए। इसके लिए कई आईएएस व आईपीएस अफसर आगे भी आए हैं। कई जगह 50-50 बच्चों को गोद लिया गया है। इन बच्चों को फल, मूंगफली, गुड़ आदि का वितरण किया जाता है। राजभवन ने 25 बच्चों को गोद लिया है। हर 10-12 दिन पर मैं खुद जाती हूं या उन्हें पोषण सामग्री भेजती हूं। प्राथमिक शिक्षा पर भी फोकस है। विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार के साथ-साथ सार्वजनिक व निजी क्षेत्र से भी सहयोग मांग रही हूं। राजधानी के अर्जुनगंज में तीन प्राइमरी स्कूलों व दो आंगनबाड़ी केंद्रों को जरूरी सुविधाओं से सुसज्जित करने के लिए सर्वेक्षण हो रहा है। कोशिश ज्यादा से ज्यादा संस्थाओं को इससे जोड़ने की है। कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसबिलिटी फंड (सीएसआर) का सही इस्तेमाल हो। बैंक के सहयोग से राजभवन के प्राथमिक विद्यालय की स्थिति सुधारी है। ‘पढ़े लखनऊ’ अभियान शुरू किया जिसे लगातार समर्थन मिल रहा है। इसी तर्ज पर 16 जिलों में शुरू हुए अभियान से 23 लाख से ज्यादा बच्चे जुड़ चुके हैं।

सवाल - सोशल वेलफेयर में अधिकारियों व राजनेताओं का कैसा सहयोग मिल रहा?
जवाब-
बहुत अच्छा। सभी तैयार हैं। मुझसे लोग मिलने आते हैं तो उन्हें प्रेरित करती हूं। लोग सहर्ष मदद तो तैयार हो जाते हैं।

'राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की इच्छा को पूरी करने की कोशिश कर रही हूं'

सवाल - सरकार की योजनाओं की समीक्षा करके आपने नई परंपरा शुरू की। इसका क्या मकसद है?
जवाब-
समीक्षा नहीं, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की इच्छा को पूरी करने की कोशिश कर रही हूं। राज्यपालों के सम्मेलन में राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री ने आकांक्षात्मक जिलों में राज्यपालों के प्रवास का आग्रह किया था। अधिकारियों से बात कर उसी बारे में पूछती हूं और समझती हूं कि और क्या हो सकता है? इससे यह जान लूं कि प्रवास के दौरान संबंधित जिले में जनसहभागिता से कौन से काम हो सकते हैं? 15 फरवरी के बाद आकांक्षात्मक जिलों के दौरे पर जाऊंगी। हर जिले में दो दिन प्रवास होगा।

सवाल - सरकार के बारे में क्या फीडबैक है?
जवाब-
ढाई साल में सरकार ने अच्छा काम किया है। नई सरकार से लोगों की अपेक्षाएं ज्यादा होती हैं लेकिन बजट तो सीमित ही रहता है। प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता, बच्चों, छोटी बच्चियों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है।

सवाल - कानून-व्यवस्था पर विपक्षी दल सरकार की घेराबंदी करते रहते हैं। प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर आपकी क्या राय है?
जवाब-
कानून-व्यवस्था पहले से सुधरी है। सीएए व एनआरसी को लेकर अन्य राज्यों की तरह यूपी में भी हिंसा हुई है। लोग बिना समझे ऐसा कर रहे हैं। जनता और सरकार की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना कतई ठीक नहीं है। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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'लखनऊ विश्वविद्यालय में परीक्षा कराकर रिजल्ट घोषित करने की प्राथमिकता'

सवाल - लखनऊ विश्वविद्यालय में पेपर लीक मामले में क्या कार्रवाई हो रही है?
जवाब-
लविवि में नए वीसी आए हैं। पहली प्राथमिकता परीक्षा कराकर रिजल्ट घोषित करने की है। इसके साथ-साथ जांच भी चलती रहेगी।

सवाल - कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश में और उत्तर प्रदेश में फर्क देखती हैं?
जवाब-
मध्य प्रदेश में काफी कम समय ही रही। वहां मैंने नैक मूल्यांकन को लक्ष्य बनाया था। इच्छा थी कि दो-तीन विश्वविद्यालय ए प्लस में आएं। पांच का चयन किया। इंदौर ए डबल प्लस में आया भी। वहां सरकार ने कुलपतियों को यह कहकर हटाना शुरू कर दिया कि संघ से जुड़े हैं। ऐसा कैसे हो सकता है।

मध्य प्रदेश में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर हमारी जीत हुई। यहां हमारी कोशिश है कि  विश्वविद्यालयों में नेकदिल, नॉन करप्ट, विजन वाले ही कुलपति बनें। उनके छात्रों से बेहतर संबंध रहें। परिवार जैसा माहौल रहे। कुलपति छात्रों की समस्या टालें नहीं, बल्कि समाधान करें।
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